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Description
पुराना लखनऊ
अब्दुल हलीम ‘शरर’ की पुस्तक पुराना लखनऊ (गुज़िश्ता लखनऊ) एक ऐसी सभ्यता का चित्र प्रस्तुत करती है जिसे हिंदुस्तान के एक प्रदेश के रहने वालों ने जन्म दिया। इस दृष्टि से यह पुस्तक एक महान सभ्यता का महान इतिहास ही नहीं है बल्कि हमारी राष्ट्रीय विरासत का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इस पुस्तक का इस दृष्टि से भी बड़ा महत्त्व है कि आज तक भारतीय संस्कृति के किसी भाग का इतना भरपूर और विस्तृत चित्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
अब्दुल हलील ‘शरर’ अपने अनेक लोकप्रिय ऐतिहासिक उपन्यासों के लिए सदैव याद रखे जायेंगे जिनमें ‘फिरदौसे बरी’, ‘मंसूर-मोहना’, ‘मलिक-उल-अज़ीज़ वर्जिना’, ‘फ्लोरा-फ्लोरिंडा’ आदि उनके जीवन काल में ही ख्याति प्राप्त कर चुके थे। लेकिन ‘गुज़िश्ता लखनऊ’ एक ऐसी पुस्तक है जो इतिहास के गर्म और दहकते हुए खून की तरह वर्तमान और भविष्य के जीवन और आनंद का संदेश लेकर जाता है और संस्कृतियों को अतीत का नया रूप और भविष्य की नयी दृष्टि प्रदान कर देता है।
‘शरर’ की यह पुस्तक केवल छपे हुए शब्दों का संग्रह ही नहीं, एक जीता-जागता अनुभव है जो इंसान को नयी दृष्टि प्रदान करता है और उसे बेहतर बनाता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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