Putali Mein Sansar

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Putali Mein Sansar

Putali Mein Sansar

60.00 54.00

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60.00 54.00

Author: Arun Kamal

Availability: 5 in stock

Pages: 104

Year: 2013

Binding: Paperback

ISBN: 9789387024588

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

पुतली में संसार

सुपरिचित कवि अरुण कमल का चौथा संग्रह ‘पुतली में संसार’ आभ्यंतर एवं बाह्य के सम्बन्धों को समझने की एक नयी कोशिश है। यहाँ कुछ भी न तो नितांत निजी है न निपट सार्वजनिक। पुतली से लेकर संसार तक एक ही प्रसार है जीवन का जहाँ सब कुछ एक दूसरे से सम्बद्ध एक दूसरे पर घात-प्रतिघात कर रहा है। इसीलिए ‘महाभारत’ के एक ख्यात प्रसंग से शुरू होकर यह संग्रह पुतली में संसार को भरने का प्रयत्न करते हुए मृत्यु के बिन्दु पर जाकर समाप्त होता है जहाँ ‘उत्तर जायेगी आखरी फिल्म पुतली पर से’। यहाँ राजनीति भी जीवन का वैसे ही एक अनिवार्य तत्त्व है जैसे शारीरिक प्रेम। राजनीतिक सत्ता द्वारा किये जा रहे मानव-जीवन के निरन्तर क्षरण एवं दरिद्रीकरण तथा आभ्यंतर के अतिक्रमण को तीक्ष्णता से प्रस्तुत करते हुए ये कविताएँ उन स्वरों, उन प्रसंगों की खोज भी करती हैं जो सत्ता का निषेध या प्रतिरोध हैं और इसीलिए जीवन के श्रेष्ठतम मूल्यों का सकार व समर्थन।

अपने पहले संग्रहों की तरह ही अरुण कमल ने साधारण जीवन की स्थितियों-दशाओं को यहाँ प्रस्तुत किया है। लेकिन अब कविताएँ अधिक भरी हुई लगती हैं तथा जीवन दृष्टि अपेक्षाकृत विकसित तथा परिपक्व। गहरे दुःख एवं विषाद से भरी ये कविताएँ आज के सम्पूर्ण भारतीय जीवन के दुःख एवं विषाद को वाणी देती हैं। यह आपबीती है और जगबीती भी। ऐसी गहरी करुणा, प्रेम और ऐन्द्रिकता समकालीन कविता में अन्यत्र दुर्लभ है। वास्तव में यह ‘सम्पूर्ण कविता’ है, जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के हर मुहूर्त में उपस्थित एवं शरीक। कम से कम में अधिक से अधिक कहने की विवशता इन कविताओं को बिम्बात्मक, सघन एवं सांद्र बनाती है। यहाँ हर कविता का अलग स्थापत्य है, अलग लयकारी। यहाँ कोई भी शिल्प रीति नहीं बनता।

इस संग्रह तक आते आते ऐसा लगता है कि अरुण कमल की कविता अपनी अधिकांश पंखुड़ियाँ लगभग खोल चुकी है। ‘पुतली में संसार’ कवि के विकास का अग्रिम चरण तो है ही, समकालीन कविता की चौहद्दी का उल्लेखनीय प्रसार भी।

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Authors

Binding

Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2013

Pulisher

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