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Samkaleen Kavita Ke Ayam
₹350.00 ₹266.00



₹350.00 ₹266.00
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Author: P Ravi
Pages: 192
Year: 2013
Binding: Hardbound
ISBN: 9788180317637
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
समकालीन कविता के आयाम
समकालीन सोच एक ओर समग्रतावादी रुख़ ग्रहण कर सामाजिक परिवर्तन की बातों पर अपना ध्यान केन्द्रित रखती है तो दूसरी ओर वह व्यक्तिवादी-अस्तित्ववादी न होकर व्यक्ति की अस्मिता के प्रति पूरी तरह सजग रहती है, अस्तित्व के प्रति भी। वह महान क्रान्ति पर नहीं, छोटी-छोटी लड़ाइयों पर आस्था रखती है। इतिहास का अन्त, विचारधारा का अन्त, कविता का अन्त वाली बातों का विरोध भी करती है। इस तरह की बातों को वह नकारात्मक मानव विरोधी सोच कहकर टाल देती है। वैश्वीकरण, बाज़ारवाद, उपभोक्तावाद, साम्प्रदायिकता, अंधाधुंध विकास नीति इत्यादि का विरोध करती है, साथ ही साथ स्त्री, दलित, आदिवासी अस्मिता पर ज़ोर देती है।
समकालीन कविता लगभग इसका अनुसरण करती आ रही है। उसके कई मायने हैं और उन मायनों में एक तत्त्व प्रमुख है, वह है उसकी मानवीय संसक्ति। समकालीन कविता मानवता की तरफ़दारी करके अपने इतिहास का विकास करती आ रही है, मानवता का इतिहास रच रही है। असल में वह समकालीन जीवन की सामाजिक-सांस्कृतिक विमर्श ही प्रस्तुत करती है। पुराने समाज के समान आज के समाज में शोषक एवं शोषित हैं, लेकिन दोनों को अलग करना कठिन कार्य हो गया है। आज शोषक स्पष्ट दिखाई नहीं देता है, वह कई रूपों-भावों-गंधों-रंगों-रुचियों के रूप में समाज की प्रगति एवं तरफ़दारी का भ्रम फैलाकर अपना काम साधता है। समकालीन कविता इस मायिकता के प्रति मनुष्य एवं समाज को सजग करती है, प्रतिरोध करने की सख़्त ज़रूरत पर बल भी देती है। कहीं-कहीं वह प्रतिरोध के मार्ग की ओर संकेत भी करती है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2013 |
| Pulisher |
पी. रवि
जन्म : 1960, ज़िला—कन्नूर, केरल।
शिक्षा : एम.ए. तथा पीएच.डी. की उपाधियाँ कोच्चीन यूनिवर्सिटी से प्राप्त किया।
प्रकाशन : ‘जन विकल्प’ समकालीन हिन्दी उपन्यास : ‘समय और संवेदना’, ‘कविता का वर्तमान’, ‘उत्तर-औपनिवेशिक विमर्श और हिन्दी कविता’ आदि पुस्तकों का सम्पादन। देश की अनेक चर्चित पत्रिकाओं में अनेक लेख प्रकाशित।
पुरस्कार : ‘विभाजन और भारतीय कहानियाँ’ पुस्तक पर केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय द्वारा पुरस्कार।
सम्प्रति : प्रोफ़ेसर, हिन्दी विभाग, श्रीशंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कालटी, केरल।

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