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Description
सांध्यगीत
सांध्यगीत में नीरजा के समान ही कुछ स्फुट गीत संग्रहीत हैं। सांध्यगीत मेरी उस मानसिक स्थिति को व्यक्त कर सकेगा जिसमें अनायास ही मेरा हृदय सुख-दुख में सामंजस्य का अनुभव करने लगा। मेरे गीत मेरा आत्मनिवेदन मात्र हैं – उनके विषय में कुछ कह सकना मेरे लिए सम्भव नहीं। इन्हें मैं अपने उपहार के योग्य अकिंचन भेंट के अतिरिक्त और कुछ नहीं मानती।
अनुक्रम
| 1 | अपने विषय में | 9 | |||||
| 2 | प्रिय साध्य गगन | 17 | |||||
| 3 | प्रिय मेरे गीले नयन | 19 | |||||
| 4 | क्या न तुमने दीप बाला | 20 | |||||
| 5 | रागभीनी तू सजनि | 22 | |||||
| 6 | अश्रु मेरे माँगने जब | 24 | |||||
| 7 | क्यों वह प्रिय आता पार नहीं | 26 | |||||
| 8 | जाने किस जीवन की सुधि ले | 28 | |||||
| 9 | शून्य मंदिर में बनूँगी | 29 | |||||
| 10 | प्रिय-पथ के यह शूल | 30 | |||||
| 11 | मेरा सजल मुख देख लेते | 31 | |||||
| 12 | रे पपीहे पी कहाँ | 33 | |||||
| 13 | विरह की घड़ियाँ हुईं | 34 | |||||
| 14 | शलभ मैं शापमय वर हूँ | 35 | |||||
| 15 | पंकज कली | 37 | |||||
| 16 | हे मेरे चिर सुन्दर अपने | 38 | |||||
| 17 | मैं सजग चिर साधना ले | 39 | |||||
| 18 | मैं किसी की मूक छाया | 40 | |||||
| 19 | यह सुख दुखमय राग | 42 | |||||
| 20 | सो रहा है विश्व | 43 | |||||
| 21 | री कुंज की शेफालिके | 44 | |||||
| 22 | मैं नीरभरी दुख की बदली | 45 | |||||
| 23 | आज मेरे नयन के | 46 | |||||
| 24 | प्राण रमा पतझार सजनि | 48 | |||||
| 25 | झिलमिलाती रात मेरी | 49 | |||||
| 26 | दीप तेरा दामिनी | 50 | |||||
| 27 | फिर विकल हैं प्राण मेरे | 51 | |||||
| 28 | मेरी है पहेली बात | 52 | |||||
| 29 | चिर सजग आँखें उनींदी | 53 | |||||
| 30 | कीर का प्रिय आज | 55 | |||||
| 31 | प्रिय चिरन्तन है सजनि | 57 | |||||
| 32 | ओं अरुण वसना | 59 | |||||
| 33 | देव अब वरदान कैसा | 60 | |||||
| 34 | तन्द्रिल निशीथ में ले आये | 61 | |||||
| 35 | यह सन्ध्या फूली सजील | 63 | |||||
| 36 | जाग-जाग सुकेशिनी री | 65 | |||||
| 37 | तब क्षण-क्षण मधु-प्याले होंगे | 67 | |||||
| 38 | आज सुनहली वेला | 68 | |||||
| 39 | नव घन आज बनो पलकों में | 69 | |||||
| 40 | क्या जलने की रीति शलभ | 70 | |||||
| 41 | सपनों की रज आँज गया | 71 | |||||
| 42 | क्यों मुझे प्रिय हों न बंधन | 72 | |||||
| 43 | हे चिर् महान् | 74 | |||||
| 44 | सखि मैं हूँ अमर सुहाग भरी | 76 | |||||
| 45 | कोकिल गा न ऐसा राग | 78 | |||||
| 46 | तिमिर में वे पदचिह्न मिले | 80 |
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |











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