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स्त्रीधन
सूत्र स्मृतिकालीन मिथिला के इतिहास पर आधारित उपन्यास स्त्रीधन मिथिला में राजतंत्र की समाप्ति, जनक वंश के अंतिम राजा कराल जनक के अन्याय, दुराचार, नीतिविरोधी प्रवृत्ति, स्वेच्छाचार और एक कुंवारी कन्या के साथ किए गए दुर्व्यवहार के कारण उसके पतन की कहानी है। उत्तर वैदिक काल के आरंभ में विभिन्न जनपदों के स्वरूप स्थिर होते होते आर्यीकरण के माध्यम से राज्यों का सीमा विस्तार हुआ और समाज कृषि विकास से वाणिज्य की ओर से उन्मुख होने लगा। नगरीकरण की प्रवृत्ति बढ़ी। वाणिज्य के लिए कैकेय से श्रावस्ती होते हुए चंपा और राजगृह तक की यात्रा जनमार्ग तथा थलमार्ग से की जाती थी। इन्हीं ऐतिहासिक तथ्यों एवं साक्ष्यों के उपयोग से तत्कालीन राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक स्थितियों और सांस्कृतिक विकास का विवरण यहाँ प्रस्तुत किया गया है। एकपत्नीव्रत आदर्श, सामाजिक दंड, विवाहोपरांत पति की संपत्ति में पत्नी के अंश आदि की चर्चा यहाँ प्रमुखता से की गई है। ऐतिहासिक विषय होने के बावजूद यहाँ अंधविश्वास और पाखंड को वल नहीं मिलता। उपन्यास को विषय हमें अपने इतिहास में झाँकने की प्रेरणा देता है और विषय के साथ भाषा शिल्प का बर्ताव इसे साहित्यिक उत्कर्ष देता है। ऐतिहासिक प्रामाणिकता एवं साहित्यिक उपादेयता-दोनों ही दृष्टि से यह उपन्यास महत्वपूर्ण है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |











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