

Stri Ki Divyta

Stri Ki Divyta
₹390.00 ₹350.00
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Author: Gulab Kothari
Pages: 277
Year: 2026
Binding: Paperback
ISBN: 9789367191545
Language: Hindi
Publisher: National Book Trust
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Description
स्त्री की दिव्यता
स्त्री दिव्यता की मूर्ति है। वह स्थूल और सूक्ष्म दोनों धरातलों पर जीती है। भारतीय मनीषा ने उसकी दिव्यता को पूजनीय माना है। जीवन (गृहस्थ) के आरंभ में वही शक्ति ‘क्षुधा’ रूप होकर प्रवेश करती है। अब वह ‘मातृरूपेण संस्थिता’ हो जाती है। पति को पुत्र भाव में लाकर ईश्वर को अर्पित कर देती है। प्रकृति में केवल ब्रह्म है। ‘एकोऽहं’ का उद्घोष है। पत्नी का प्राकृतिक स्वरूप है ही नहीं। अपना विस्तार (बहुस्याम) करने के लिए उसने स्त्री रूप माया को पैदा किया। तब स्त्री की ब्रह्म के जीवन में क्या स्थिति बनी। ऊपर से ब्रह्म करता कुछ नहीं है। सारे कर्म प्रकृति रूप में माया करती है। इसके लिए माया का ब्रह्म के हृदय के पास रहना आवश्यक है। सूक्ष्म भाव में माया ब्रह्म की कामना बनकर मन में रहती है। स्थूल सृष्टि में स्त्री का ब्रह्मभाव (प्राण) पुरुष (पति) के हृदय में स्थापित कर दिया जाता है। उसके जो-जो कर्म पूर्ण मनोयोग से किए जाते हैं, उनके फल पति के फलों के साथ जुड़ते जाते हैं। पति की गति ही उसकी गति हो जाती है। अतः पति को सदा सत्कर्म के लिए ही प्रेरित करती है। अपने सत्कर्म भी वहीं जोड़ती जाती है।
विद्यावाचस्पति गुलाब कोठारी वेद विज्ञान के अध्येता, राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक हैं। उनके लेखन में वेद-उपनिषद्-गीता उद्धृत हैं, मंत्र हैं तो व्यवहार जगत भी है। नई पीढ़ी को इस ज्ञान से जोड़ने के लिए पिछले चार दशक से भारतीय वाङ्गय की वैज्ञानिकता को प्रमाणित करने को कटिबद्ध हैं। मानस, गीता विज्ञान उपनिषद्, वेद विज्ञान उपनिषद्, मैं ही राधा मैं ही कृष्ण, ब्रह्म विवर्त उनकी चिंतन धारा की कतिपय प्रतिनिधि रचनाएं हैं। इसी श्रृंखला में 2025 में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से प्रकाशित इनकी पुस्तक स्त्री देह से आगे अति चर्चित एवं लोकप्रिय रही है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |









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