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Swami Ramanand : Jivan Aur Darshan
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Author: Kanhaiya Singh
Pages: 128
Year: 2024
Binding: Hardbound
ISBN: 9789393603401
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
स्वामी रामानन्द : जीवन और दर्शन
स्वामी रामानन्द एक युगपुरुष थे। चौदहवीं शताब्दी में उन्होंने दक्षिण भारत से भगवान विष्णु की भक्ति को रामभक्ति के रूप में लाकर प्रतिष्ठित किया और विपरीत प्रतीत होने वाली दो धाराओं में समन्वय और सामंजस्य स्थापित किया।
उन्होंने निर्गुण और सगुण भक्ति के समन्वय का कार्य किया। उनके अनुसार ये दोनों ही भक्तिमार्ग विधेय हैं। इन दोनों को जोड़ने का सेतु उनका ‘राम-नाम’ का मंत्र बना। नाम का जप करना निर्गुण और सगुण दोनों ही मार्गों के कवियों ने स्वीकार किया।
स्वामी जी ने यह कहा कि ब्राह्मण शूद्र सहित चारों वर्ण के लोग भक्ति के अधिकारी हैं। उनके द्वारा समन्वय के सम्बन्ध में कहा गया –
‘जाति पाँति पूछै नहिं कोई। हरि को भजै सो हरि का होई।’
उनके अनुसार पुरुष की भाँति स्त्री भी भक्ति की कारिणी है।
स्वामी जी ने इस प्रकार अपने समन्वय और सामंजस्य के द्वारा एक प्रबल-सबल राष्ट्र- निर्माण की वह भूमिका बनाई जो भारत को एक भव्य-दिव्य भारत बनाकर विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित कर सकती है।
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| Binding | Hardbound |
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| Language | Hindi |
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| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |
कन्हैया सिंह
प्रमुख भारतीय साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह पाठ-सम्पादन एवं सूफ़ी काव्य के अधिकृत विद्वान् के रूप में हिन्दी जगत् में सुपरिचित हैं।
आजमगढ़ जनपद में जन्में डॉ. कन्हैया सिंह एम.ए., एल.एल-बी., पी–एच-डी., डी-लिट् की उपाधि प्राप्त हैं।
विधि प्रवक्ता के रूप में इन्होंने अपने अध्यापकीय जीवन का प्रारम्भ करते हुए हिन्दी के प्रवक्ता-रीडर अध्यक्ष, प्राचार्य, कार्यकारी अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान, आदि दायित्वों का निर्वहन किया। इनकी चर्चित पुस्तकों में-सूफ़ी काव्य : सांस्कृतिक अनुशीलन, युगद्रष्टा मलिक मुहम्मद जायसी, सूफ़ीमत, हिन्दी सूफ़ी काव्य में हिन्दू संस्कृति, उदार इस्लाम का सूफ़ी चेहरा, पाठसम्पादन के

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