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तीन सौ रामायण
तीन सौ रामायण बहुभाषाविद, लोकवार्ताकार,अनुवाद, कवि और अध्यापक रामानुजन द्वारा संसार में रामकथा की अद्भुत विविधतापूर्ण व्याप्ति और इसके भीतर छिपे अर्थ संसार के विराट संभावना लोक का अत्यंत ही संवेदनशील दृष्टि से किया गया उद्घाटन है। सहस्रों वर्षों से अनेकानेक संस्कृतियों की अनेक पीढियां धर्मों की बाधाओं से परे इस कथा में अपने जीवन अर्थों का सृजन करती आई हैं।
यह देख कर आश्चर्य होता है कि इस कथा में कितना लचीलापन रहा है। रामानुजन इस लेख में राम-कथा की विविधता के माध्यम से अर्थ-निर्माण और अनुवाद की प्रक्रिया पर भी विचार करते हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2012 |
| Pulisher |











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