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Description
विक्टर और वेताल 2.0
अंशुमान तिवारी बेबाक, विचारशील, बहुपठित, बहुआयामी पत्रकार हैं। फुर्तीले, ऊर्जावान और हमेशा उम्मीद, सम्भावनाओं और भविष्य से भरे हुए। वे भाषा की जड़ता को तोड़ते हुए मुश्किल को आसान बनाते हैं। अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र और इतिहास की गुत्थियों को वे बड़ी सहजता से सुलझाते हैं। इससे ज्ञान का सरलीकरण जनसामान्य तक सहज पहुँचता है। लोकमन की पहचान ही उनके लेखन का आधार है।
विक्टर और वेताल वर्तमान को पकड़ इतिहास में झाँकने की एक तड़प है। कथ्य के अनूठे शिल्पगत प्रयोग से सजी यह हिन्दी की पहली किताब है जिसमें आज की हर कथा के गुणसूत्र इतिहास में ढूँढ़े गये हैं। अंशुमान अपनी तीक्ष्ण मेधा और शोधवृत्ति से दिखाते हैं कि जो आज है, वह पहले भी था। यानी आज की हर कथा दरअसल इतिहास का दोहराव मात्र है। अंग्रेजी में इस विधा को ‘डेजा-वू’ कहते हैं। मगर हिन्दी की दुनिया पहली बार इस प्रयोग से परिचित होगी। अंशुमान का आर्थिक लेखन भी हिन्दी में बेजोड़ रहा है। उनकी तीन किताबें अर्थात्, लक्ष्मीनामा और उलटी गिनती बहुप्रशंसित हैं। पर कथ्य, विन्यास और शिल्प की दृष्टि से विक्टर और वेताल न सिर्फ़ अनूठी है, उसमें कल्पना का नावीन्य भी है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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