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Description
गेशे जम्पा
‘गेशे जम्पा ‘ भारत में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों की अहिंसक मुक्ति-साधना एवं उनकी सांस्कृतिक, सामाजिक अस्मिता के लिए छटपटाहट को आधार बनाकर हिन्दी में लिखा गया अपनी तरह का पहला अनूठा उपन्यास है।
समकालीन सामान्य प्रवृत्तियों से बिल्कुल हटकर नीरजा माधव का लेखन अपने समय की राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय चिन्ताओं और चुनौतियों के लिए सहज तो दिखाई पड़ता ही है, वह अपने लिए एक नयी और मजबूत जमीन भी तैयार करता है। कथा-संसार में नीरजा माधव की उपस्थिति एक विशेष अर्थ रखती है।
एक तरफ तिब्बती शरणार्थियों की इतनी बड़ी संख्या हमारे देश में है, दूसरी तरफ चीन के साथ भारत की अपनी विदेश नीति, लेकिन भारत में तिब्बत की निर्वासित सरकार के पीठासीन होने के कारण जब भी तिब्बत में आग भड़की, उसकी आंच भारत और चीन के सम्बन्धों ने भी महसूस की। तिब्बत के प्रति सहानुभूति का भाव रखते हुए भी विश्व के अधिकांश देश इसे चीन और तिब्बत का आन्तरिक मामला मानते हुए चुप रहने की नीति अपनाते रहे हैं।
तिब्बतियों की स्वतंत्र सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता के प्रश्न पर छाई वैश्विक चुप्पी तोड़ने की दिशा में एक छोटी-सी हलचल के रूप में नीरजा माधव का यह अनूठा उपन्यास तिब्बती अनुभूति और उनकी लोक संस्कृति की जीवन्त अभिव्यक्ति है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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