Govind Purushottam Deshpandey
गोविन्द पुरुषोत्तम देशपाण्डे
मराठी के सुप्रसिद्ध नाटककार गोविन्द पुरुषोत्तम देशपाण्डे का जन्म 2 अगस्त, 1938 को नासिक, महाराष्ट्र में हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा रहिमतपुर, सतारा में और परवर्ती शिक्षा क्रमश: बड़ौदा, पुणे और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में पूरी हुई। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अन्तरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान, में चीनी अध्ययन के प्रोफ़ेसर रहे। चीनी मामलों और अन्तरराष्ट्रीय समस्याओं पर अंग्रेज़ी और मराठी में महत्त्वपूर्ण लेखन किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘उद् ध्वस्त धर्मशाला’, ‘एक वाजून गेला आहे’, ‘मामका: पांडवाश्चैव’, ‘अस्सा नवरा सुरेख बाई!’, ‘अन्धार यात्रा’ (नाटक); ‘इत्यादि, इत्यादि कविता’ (कविता-संग्रह); ‘डायलेक्टिक्स ऑफ़ डिफ़ीट : प्रॉब्लम ऑफ़ कल्चर इन पोस्ट कोलोनियल इंडिया (निबन्ध); ‘मॉडर्न इंडियन ड्रामा (सं.)’।
‘उद् ध्वस्त धर्मशाला’ नाटक का हिन्दी के अलावा बांग्ला, कन्नड़ और तमिल में अनुवाद हो चुका है। अन्य नाटक भी हिन्दी में अनूदित हैं। इन नाटकों के कई सफल मंचन भी हुए हैं।
उन्हें 1977 में ‘महाराष्ट्र राज्य सम्मान’ और 1996 में ‘संगीत नाटक अकादेमी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
16 अक्टूबर, 2013 को पुणे, महाराष्ट्र में उनका निधन हुआ।

