Kumar Vimal

Kumar Vimal

कुमार विमल

जन्म : 12 अक्टूबर, 1931

साहित्यिक जीवन का प्रारम्भ काव्य-रचना से हुआ। किन्तु, क्रमशः आलोचना में प्रवृत्ति रम गई। 1949 से ही हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविता, कहानी, आलोचनात्मक निबन्धादि प्रकाशित होते रहे हैं।

पटना विश्वविद्यालय से सन् 1954 में एम.ए. (हिन्दी) और सन् 1964 में डी.लिट्. की उपाधि प्राप्त की। बिहार लोक सेवा आयोग के सम्मानित सदस्य रहे। इसके पूर्व बिहार राष्ट्रभाषा-परिषद्, पटना के निदेशक पद पर कार्य कर चुके थे। इन्होंने बिहार सरकार द्वारा स्थापित साहित्यकार कलाकार-कल्याण कोष-परिषद् के आद्य सचिव के रूप में बिहार के अनेक साहित्यकारों और कलाकारों की उल्लेखनीय सेवा की। अध्यापन के प्रति सहज अनुराग रहा। विमल जी पटना विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक हिन्दी के अध्यापक रहे।

सन् 1973 में इन्होंने राजकीय अतिथि के रूप में जर्मनी, चेकोस्लोवाकिया और सोवियत रूस की सांस्कृतिक यात्रा की तथा यूरोप के अन्य कई देशों का भ्रमण किया। इनकी आलोचनात्मक कृतियाँ पुरस्कार-योजना समिति, उत्तर प्रदेश; बिहार राष्ट्रभाषा-परिषद् तथा हरजीमल डालमिया पुरस्कार समिति, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत हो चुकी हैं।

प्रमुख कृतियाँ : ‘सौन्दर्यशास्त्र के तत्त्व’, ‘छायावाद का सौन्दर्यशास्त्रीय अध्ययन, ‘मूल्य और मीमांसा’, ‘नई कविता, नई आलोचना और कला’, ‘साहित्य चिन्तन और मूल्यांकन’, ‘आलोचना और अनुशीलन’ आदि।

निधन : 26 नवम्बर, 2011

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