Tej Pratap Narayan
तेज प्रताप नारायण
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट और अँग्रेजी साहित्य में पराखातक तेज प्रताप नारायण की रचनाएँ साहित्य और विज्ञान के संगम की तरह हैं। साहित्य में विज्ञान का सुन्दर समावेश करने वाले विरले साहित्यकारों में तेज प्रताप नारायण का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मूलतः बहराइच, उ. प्र. के रहने वाले तेज प्रताप नारायण का डेरा अभी देश के दिल में है। प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ, समीक्षा और लेख प्रकाशित।
कृतियाँ: ‘सूरज की नई किरण’, ‘अपने-अपने एवरेस्ट’, ‘सीमाओं के पार’, ‘किंतु परंतु, ‘दिसंबर की वो सर्द रात’, ‘बुद्ध होने के मायने’, ‘एक नदी थी सई’ और ‘ईश्वर की खोज’ (कविता संग्रह); ‘कितने रंग जिंदगी के’, ‘एयरपोर्ट पर एक रात’ (कहानी संग्रह); ‘टेक्निकल लव’, ‘बदलते अक्षांश’ (उपन्यास); साझा उपन्यास ‘जिंदगी है हैंडल हो जाएगी’; ‘जीरो बटा सन्नाटा’ (व्यंग्य संग्रह); ‘खामोशी टूटने को है’ (गजल संग्रह); ‘कस्तूरी कुंडल बसे’, ‘गोली डंडा व होइंगा’, ‘पेट चीर दिया ब होईगा’ (लेख संग्रह)।
इनके लेखन के लिए इनको कई सम्मानों और पुरस्कारों से नवाजा गया है। जिसमें कविता के लिए भारत सरकार का मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कहानी और उपन्यास के लिए प्रेमचंद सम्मान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त साहित्य गौरव सम्मान, लिटरेरी एक्सीलेंस अवार्ड, शब्द श्री सम्मान जैसे सम्मान भी विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा दिये गये हैं।

