

3020 AD

3020 AD
₹450.00 ₹370.00
₹450.00 ₹370.00
Author: Rakesh Shankar Bharti
Pages: 200
Year: 2021
Binding: Hardbound
ISBN: 9789390265336
Language: Hindi
Publisher: Aman Prakashan
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Description
3020 ई.
इस उपन्यास के पहले भाग में लेखक कुछ संस्मरण याद करते हुए भूमिका बाँधता है कि उपन्यास लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली। कैसे संक्रमण फैलते हैं यानी कि कोरोना काल उनके दिमाग़ को भी मथने लगता है। उसके विवरण एन.डी.टी.वी. के एंकर रवीश कुमार से लेकर, पुस्तक मेले और कोविड-19 से लड़ते हुए मज़दूर और उनकी फटी और ख़ून से रिसती एड़ियों तक के बारे में बात करता है। उसका चरित्र धर्मपाल चीन को गरियाता भी है। एक ख़ास बात यह है कि उपन्यास भारत और यूक्रेन दोनों जगहों को साथ लेकर चलता है। यूक्रेन वाले उप-कथानक से गुज़रते समय नीली-भूरी आँखों वाली ख़ूबसूरत यूक्रेनी महिला उल्याना की मारमिक प्रेम कहानी पढ़कर हम बहुत भावुक हो जाते हैं और हमारी आँखों से आँसू भी टपक पड़ते हैं। फिर हमें इस सूक्ष्म अदृश्य कोरोना विषाणु पर बहुत क्रोध आता है, जिसने उल्याना जैसे कितने बहनों और भाइयों को दुख में धकेल दिया है और कितनों परिवारों की ख़ुशी छीन ली है। भारत के उप-कथानक में दादा धर्मपाल, बेटा द्वारपाल और पोता रामपाल की प्रेम कहानियाँ भी कम रोचक नहीं हैं। इस भारतीय उप-कथानक से हमें साफ़ संदेश मिल जाता है कि जब यह कोरोना वायरस इंसान के बीच जाति-पाति, ऊँच-नीच, काले-गोरे वग़ैरह का भेदभाव करके संक्रमित नहीं करता है तो फिर हम मानव आपस में इस समाज में भेदभाव क्यों करते हैं।
कोरोना के विश्वव्यापी प्रभाव पर भी लेखक बात करता है। और इस सबका रिश्तों पर क्या असर पड़ रहा है, इस पर भी उनकी कलम चलती है। बाज़ायदा कोरोना के लक्षणों और उनके संभावित इलाज की चर्चा भी उपन्यास में मौजूद है।
मगर उपन्यास का सबसे अधिक आकर्षक हिस्सा है मंगल पर इंसान का पहुँचना और वहाँ जीवन जीने का ढंग। वहाँ बहुत चतुराई से राकेश भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ले आता है और फिर अपने पुत्र और नरेंद्र मोदी के माध्यम से एक फ़न्टेसी रचता है जो हिंदी पाठकों को लिए कुछ नये किस्म का गद्य महसूस होगा। लेखक जो कि राकेश का ही एक एक्सटेंशन हो सकता है, नरेंद्र मोदी के साथ अपने संघर्षों की भी बातचीत करता है।
मंगल ग्रह पर मानव बस्ती, लाल ज़मीन, कब्रिस्तान… ये सभी राकेश शंकर भारती की कल्पना शक्ति के प्रमाण हैं। मैं हिंदी के इस नये ढंग से लिखे गये उपन्यास का हिंदी जगत में स्वागत करता हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह पाठकों और आलोचकों को भी पसंद आएगा।
– तेजेन्द्र शर्मा, एम.बी.ई.
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |









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