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Aadivasi Samaj Aur Sahitya
₹250.00 ₹200.00
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Author: Ramanika Gupta
Pages: 144
Year: 2022
Binding: Paperback
ISBN: 9788171383252
Language: Hindi
Publisher: Samayik Prakashan
आदिवासी समाज और साहित्य
‘आदिवासी समाज और साहित्य’ इस क्षेत्र की विशेषज्ञ रमणिका गुप्ता द्वारा संपादित पुस्तक है। यह अपनी भूमिका से ही सचेत करती है कि आदिवासी समाज को समझने के लिए उनके वाचिक साहित्य को जानना जरूरी है।
के. सच्चिदानंदन, महाश्वेता देवी, डॉ. गणेश एन. देवी, रामदयाल मुंडा, लक्ष्मण गायकवाड़, गोपीचन्द नारंग, हरिराम मीणा, निर्मला पुतुल,
महादेव टोप्पो, डॉ. विनायक तुमराम सहित अनेक महत्त्वपूर्ण लेखकों, समाजशास्त्रियों व विचारकों के आलेखों से सज्जित यह पुस्तक आदिवासी समाज की ओर एक उल्लेखनीय खिड़की बन गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य इस समाज की दबा दी गई पहचान को रेखांकित करना भी है।
इस पुस्तक में ‘आदिवासी साहित्य क्यों लिखा जाए’, ‘किसे कहा जाए’, ‘आदिवासी साहित्य क्या है’ या ‘आदिवासी साहित्य कैसा हो’, पर गहन विमर्श ही नहीं किया गया है बल्कि आदिवासी समाज के मूल्यों, उसकी संरचना, उसके अस्तित्व पर मंडराते खतरे और विकास के नाम पर हो रहे विनाश से उपजी समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार किया गया है।
रमणिका फाउंडेशन ने आदिवासी साहित्य पर गम्भीर शोध कराया है। अखिल भारतीय आदिवासी लेखक सम्मेलन में सामने आए महत्त्वपूर्ण विचारकों का इस पुस्तक में उल्लेखनीय योगदान है।
इस पुस्तक को आदिवासियों के जमीनी आन्दोलन के बरक्स उनके द्वारा रचित समकालीन साहित्य का घोषणापत्र भी माना जा सकता है। यह इस दिशा में पहला स्थायी महत्त्व का काम है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |
रमणिका गुप्ता
जन्म : 22 अप्रैल, 1930; सुनाम (पंजाब)।
शिक्षा : एम.ए., बी.एड.।
रमणिका गुप्ता बिहार/झारखंड की विधायक एवं विधान परिषद् की सदस्य रहीं। कई ग़ैर-सरकारी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं से सम्बद्ध तथा सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनैतिक कार्यक्रमों में सहभागिता। आदिवासी, दलित, महिलाओं व वंचितों के लिए आजीवन कार्यरत। कई देशों की यात्राएँ। विभिन्न सम्मानों एवं पुरस्कारों से सम्मानित जिनमें ‘गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार’, ‘आजीवन आदिवासी बंधु पुरस्कार’ भी शामिल हैं।
प्रकाशित कृतियाँ : अब तक 16 कविता-संग्रह, दो उपन्यास, दो कहानी-संग्रह, दो कहानी-संग्रह सम्पादित, एक यात्रा-संस्मरण और दो आत्मकथा—‘आपहुदरी’ व ‘हादसे’।
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