Aangan Ki Bel

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249.00 190.00

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Author: Anil Agnihotri

Availability: 5 in stock

Pages: 140

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9789372517958

Language: Hindi

Publisher: Bodhi Prakashan

Description

आँगन की बेल

आत्म-कथ्य

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने अपने निबंध संग्रह ‘चिंतामणि-भाग एक’ में ‘कविता क्या है ?’ निबंध में कविता को परिभाषित करते हुए लिखा है कि ‘जिस प्रकार आत्मा की मुक्ता अवस्था ज्ञान दशा कहलाती है उसी प्रकार हृदय की यह मुक्ता अवस्था रस दशा कहलाती है। हृदय की इसी मुक्ति साधना के लिए मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आई है उसे ही कविता कहते हैं।’

उपरोक्त कथन के आलोक में वर्तमान परिदृश्य में कविताएं खूब लिखी जा रही हैं। कविता के कारखाने में कविता का विपुल उत्पादन हो रहा है। कुछ अपवादों को हम छोड़ दें तो विचारणीय यह है कि इस उत्पादन में कविता और कवि की भूमिका कितनी है ? कविता के संदर्भ में आज यह प्रश्न विचारणीय बन गया है। मैं छांदस और छंदहीन कविता की बहस में नहीं पड़ना चाहता। अतुकांत कविता भी लय और गति मांगती है और उसका भी अपना एक शिल्प है।

कविता का मूल तत्व उसका ‘कंटेन्ट’ है। विचार प्रवाह है। कविता में समष्टिगत चेतना और लोकधर्मिता भी आवश्यक है। सामाजिक सरोकारों से विमुख कविता दीर्घजीवी नहीं होती। लय और शिल्प उसके अलंकरण है। हृदय से निःसृत भाव ही कविता की भाव-भूमि का निर्धारण करते हैं, इसमें कोई दो राय नहीं है।

मैं इस मुगालते में कतई नहीं हूँ कि मैं एक अच्छा कवि हूँ। हाँ-अच्छा पाठक जरूर हूँ। कविता पढ़ना मेरा शगल है। विचार-सरणियों के उद्रेक में जो कुछ भी जब भी मन में आया उसे कागज के छोटे-छोटे पुर्जों में पिरोता रहा। मेरा सारा लेखन स्वांतः सुखाय है। आप कह सकते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर यह पहला काव्य संग्रह तो कहना चाहता हूँ कि निवृत्ति के बाद भी मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया इसके पीछे आलस्य और प्रमाद ही मूलतः रहे हैं।

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Paperback

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Pages

Language

Hindi

Publishing Year

2025

Pulisher

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