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Description
आपहुदरी (एक जिद्दी लड़की की आत्मकथा)
विविधता भरे अनुभवों की धनी रमणिका गुप्ता की आत्मकथा की यह दूसरी कड़ी ‘आपहुदरी’ एक बेहद पठनीय और लोकप्रिय आत्मकथा है। उनकी आत्मकथा की पहली कड़ी ‘हादसे’ से यह कई अर्थों में अलग है। सच कहें, तो यही है उनकी असल आत्मकथा…।
यहां लेखिका का निजी जीवन, उनके संघर्ष का सच एक स्त्री की कसौटी पर उद्घाटित हुआ है। यहां एक सुदीर्घ जीवन की कहानी है जहां एक रचनाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता के रूप में रमणिका गुप्ता का धनबाद तक का जीवन बड़े रोचक ढंग से सामने आता है।
दरअसल आत्मकथा लेखन के लिए जिस जरूरी हिम्मत और सच कहने की सलाहियत होती है वह रमणिका जी में कूट-कूटकर भरी है।
हिन्दी में यह एक बेबाक और निर्भीक स्त्री के जीवन पर आधारित ऐसी आत्मकथा है जिसे पाठक एक रोचक उपन्यास की तरह पढ़ेंगे। रमणिका गुप्ता की इस बेहद बोल्ड आत्मकथा को पढ़कर कुछ और रचनाकार आत्मकथा लिखने की हिम्मत दिखाएं तो हमारा यह प्रयास सफल होगा। यह आत्मकथा बताती है कि जीवट किसे कहते हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2020 |
| Pulisher |











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