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Amir Khusro : Kaljayi Kavi Aur Unka Kavya
₹185.00 ₹140.00



₹185.00 ₹140.00
₹185.00 ₹140.00
Author: Madhav Hada
Pages: 128
Year: 2021
Binding: Paperback
ISBN: 9788195297573
Language: Hindi
Publisher: Rajpal and Sons
अमीर ख़ुसरो : कालजयी कवि और उनका काव्य
गागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विशाल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है।
प्रस्तुत पुस्तक में अमीर ख़ुसरो (1262 -1324) के विशाल साहित्य भण्डार से चुनकर प्रतिनिधि पहेलियाँ, मुकरियाँ, निस्बतें, अनमेलियाँ, दो सुखन और गीत दिए गए हैं जो पाठकों को ख़ुसरो के साहित्य का आस्वाद दे सकेंगे। ख़ुसरो हिन्दी के प्रारम्भिक कवियों में माने जाते हंै। बहुमुखी प्रतिभा के धनी खुसरो ने अरबी, फ़ारसी और तुर्की में भी विपुल मात्रा में लेखन किया। अपने को ‘हिन्दुस्तान की तूती’ कहने वाले ख़ुसरो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ’हिन्दवी’ का प्रयोग किया। भारतीय जनजीवन और लोक की गहरी समझ और उसके प्रति प्रेम ख़ुसरो के साहित्य की बड़ी विशेषता है, यही कारण है कि लंबा समय व्यतीत हो जाने पर भी उनकी रचनाएँ आज भी भारतीय जनमानस में लोकप्रिय हैं। सल्तनत काल के अनेक शासकों के राज्याश्रय में रहे ख़ुसरो उदार सोच रखते थे और उनमें धार्मिक संकीर्णता और कट्टरता बिलकुल नहीं थी।
इस चयन के सम्पादक डॉ. माधव हाड़ा मध्यकालीन साहित्य के मर्मज्ञ हैं। वे उदयपुर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर और हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं और इन दिनों भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में फ़ैलो हैं।
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |
माधव हाड़ा
जन्म : मई 9, 1958
शिक्षा : पी.एच.डी., एम.ए. (हिन्दी)
संप्रति : आचार्य एवं अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर
पुरस्कार : प्रकाशन विभाग, भारत सरकार का भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार (2012), राजस्थान साहित्य अकादमी का देवराज उपाध्याय आलोचना पुरस्कार (1990) रत्न; मौलिक पुस्तक : मुनि जिनविजय (2016), पचरंग चोला पहर सखी री मीरां का जीवन और समाज (2015), सीढ़ियाँ चढ़ता मीडिया (2012), मीडिया, साहित्य और संस्कृति (2006), कविता का पूरा दृश्य, (1992), तनी हुई रस्सी पर, (1987)
संपादित पुस्तक : मीरां रचना संचयन (2017), कथेतर (2017), स्वयं प्रकाश की लोकप्रिय कहानियाँ (2016), लय (1996)

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