- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
आनंदमठ
‘आनंदमठ’ का केंद्रीय विषय छिहत्तर का संवत्सर और संन्यासी विद्रोह है। ये दोनों मूल घटनाएं बांग्ला इतिहास में संधिकाल की तरह उपस्थित होती हैं। इसलिए ‘आनंदमठ’ की विषय-वस्तु में ऐतिहासिकता है। ऐसे में स्वाभाविक ही एक धारणा यह बनती है कि ‘आनंदमठ’ को ऐतिहासिक उपन्यास कहा जा सकता है। पर यह धारणा तब बदल जाती है, जब हम इस उपन्यास के कथा-विन्यास पर नजर डालते हैं। पृष्ठभूमि ऐतिहासिक होते हुए भी, आनंदमठ की कथा मूल रूप से जीवानंद-शान्ति के व्रत और महेंद्र-कल्याणी के दुर्भाग्य पर केंद्रित है। इसमें इतिहास का यथार्थ तब उपस्थित होता है, जब आगे चल कर भारतवर्ष में क्रांतिकारी आंदोलन की कवि-कल्पना उपस्थित होती है। उस दौर के बांग्ला-जीवन में ऐसे गंभीर देशप्रेम की परिकल्पना एक तरह से असंभव बात थी। पर, उस कालखंड में असंभव होते हुए भी, ‘आनंदमठ’ एक अनिवार्य बीज-वपन करने में सफल हो सका, जो बांग्ला जनमानस में व्यापक भावतरंग जगा गया। यह भावतरंग थी, स्वाधीनताकामी बंगाली-जन में आवेग-विह्वलता। इसलिए ‘आनंदमठ’ की ऐतिहासिक नहीं, राजनीतिक उपन्यास के रूप में विवेचना की जाती है।
Additional information
| Binding | Paperback |
|---|---|
| Language | Hindi |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher | |
| Authors | |
| ISBN | |
| Pages |











Reviews
There are no reviews yet.