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अपने खिलौने
[1]
मीना !
आप कहेंगे, नाम कुछ ऊँची कोटि का, कुछ आधुनिक ढंग का, कुछ सुरुचि की नई परिभाषा की कसौटी पर कसा हुआ-सा है। और मैं अत्यन्त विनयपूर्वक यह सब स्वीकार भी करता हूँ; लेकिन मैंने यह कब कहा कि यह लड़की निम्न वर्ग की है, या फिर पुरानी परम्पराओं में पली हुई है ? विलायत से लौटे हुए, शान-शौकत से युक्त एक ऊँचे सरकारी अफसर की लड़की को जैसा होना चाहिए, उससे कम तो यह मीना हो नहीं सकती। अगर कुछ हो सकती है तो उससे कुछ इक्कीस ही निकलती हुई; यानी जब दिखती है, तब रेशमी साड़ी में।
जहाँ तक रेशमी कपड़ों का प्रश्न है, वहाँ मैं केवल इतना ही जानता हूँ कि रेशम तीन तरह का होता है। पहला निहायत सस्ता। पतला इतना कि पाँच-पाँच तहों से भी शरीर की आभा साफ झलके। रंग-बिरंग का; फूल, पत्ती, कुत्ता, बिल्ली, बन्दर, आदमी तक की शक्लें भी आपको उसपर छपी हुई मिलेंगी; लेकिन लोगों का कहना है कि यह रेशम असली नहीं होता। एक दफे धुलाइए तो रंग-वंग क्या, कपड़ा गायब, ऐसी हालत में मीना इस सस्ते और नकली रेशम को तो पहन नहीं सकती; कम-से-कम मैंने उसे इस प्रकार के रेशम को पहनते नहीं देखा।
दूसरे किस्म का रेशम, रेशम इसलिए कहा जा सकता है कि वह रेशम है और सूती कपड़ों से कुछ अधिक महँगा पड़ता है, देशी होता है, इसलिए उसका प्रचार है, और रेशम होने के नाते कुछ मजबूत भी होता है। खादी भंडारों में जोरों के साथ बिकता है; छपाई-सफाई भी अच्छी ही होती है।
तीसरे किस्म का रेशम ही रेशम कहला सकता है। यानी आँख न ठहरे वह चमक, और उँगली फिसल जाए वह मुलायमियत। इसके बाद मुझे रेशम के सम्बन्ध में कोई बात ज्ञात नहीं, सिवा इसके कि इस किस्म का रेशम विलायत में बनता है और नाम भी विलायती होते हैं, यानी जैसे क्रेप, जॉर्जेट, शिफॉन आदि-आदि। वैसे लोगों का कहना है कि हमारे देश में भी यह रेशम बनने लगा है और यहाँ का बना रेशम विलायती रेशम से अधिक सस्ता होता है और इसपर मुझे बड़ी प्रसन्नता है; लेकिन मैं कभी भी देशी-विलायती रेशम की शिनाख्त न कर सकूँगा और कौन सस्ता है और कौन महँगा है, इसकी तमीज़ मुझे न आज तक है और न भविष्य में होने की सम्भावना है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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