Ek Boond Sahasa Uchhali
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Description
एक बूँद सहसा उछली
एक बूँद सहसा उछली पुस्तक में अज्ञेय की यात्राओं का समुद्रपारीय संसार है। यह सारे यूरोप का एक भव्य और भीतरी यात्रावृत्त है लेकिन यह यात्रा भूगोल की जानकारी भर नहीं है बल्कि अज्ञेय के अनुसार यह यात्रावृत्त उन सभी स्थानों के प्रभाव और संवेदना का आकलन है जहाँ भी वे गये। पुस्तक के प्रति पाठक की भी ऐसी दृष्टि निर्मित हो जाती है कि वह देश में नहीं, काल में भी यात्रा करता है। लेखक, जो स्थान, क़िस्से, संस्मरण और यात्राओं के प्रभाव व अनुभव पाठक के सामने लाता है उसका सांस्कृतिक अर्थ और महत्त्व दोनों ही हैं। सागर में एक बूँद का सहसा उछलना और सूरज की रोशनी में रंग जाना, इस पुस्तक का यही परिदृश्य है और यह परिदृश्य विराटता का निर्माण करता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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