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Itihas Aur Aalochana
₹795.00 ₹590.00



₹795.00 ₹590.00
₹795.00 ₹590.00
Author: Namvar Singh
Pages: 178
Year: 2024
Binding: Hardbound
ISBN: 9788126705108
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
इतिहास और आलोचना
इतिहास और आलोचना स्वातंत्रयोत्तर हिन्दी साहित्य के प्रथम दशक में साहित्य के प्रगतिशील मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए किए जानेवाले संघर्ष का ऐतिहासिक दस्तावेज है। आरम्भ के आठ निबन्धों में उन व्यक्ति-स्वातंत्रयवादी साहित्यिक मान्यताओं का तर्क पूर्ण खंडन किया गया है जो शीतयुद्ध की राजनीति के प्रभाव में साहित्य के अन्दर वास्तविकता के स्थान पर ‘अनुभूति’ को, वस्तु के उस रूप को और व्यापकता से अधिक गहराई को स्थापित करने का प्रयत्न कर रही थीं।
अन्त के चार निबन्धों में इतिहास के एक नए दृष्टिकोण के साथ साहित्यिक इतिहास के पुनर्मूल्यांकन की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है, जिससे समकालीन समस्याओं के समाधान के लिए एक वस्तुगत सैद्धांतिक आधार उपलब्ध होता है। नई कविता और छायावाद के कुछ पक्षों की व्यावहारिक आलोचना इस ग्रंथ का अतिरिक्त आकर्षण है। कुल मिलाकर विचारों की ताजगी और द्वन्द्वात्मक विवेचन शैली के कारण इतिहास और आलोचना आज भी प्रासंगिक पुस्तक है।
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| Binding | Hardbound |
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| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |
नामवर सिंह
जन्म-तिथि : 28 जुलाई, 1926।
जन्म-स्थान : बनारस जिले का जीयनपुर नामक गाँव।
प्राथमिक शिक्षा बगल के गाँव आवाजापुर में। कमालपुर से मिडिल। बनारस के हीवेट क्षत्रिय स्कूल से मैट्रिक और उदयप्रताप कालेज से इंटरमीडिएट। 1941 में कविता से लेखक जीवन की शुरुआत। पहली कविता इसी साल ‘क्षत्रियमित्र’ पत्रिका (बनारस) में प्रकाशित। 1949 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बी.ए. और 1951 में वहीं से हिन्दी में एम.ए.। 1953 में उसी विश्वविद्यालय में व्याख्याता के रूप में अस्थायी पद पर नियुक्ति। 1956 में पी-एच.डी. (‘पृथ्वीराज रासो की भाषा’)।

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