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Kahati Hai Auraten
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Author: Anamika
Pages: 288
Year: 2022
Binding: Paperback
ISBN: 9789355180346
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
कहती हैं औरतें
भेदभाव, व्यभिचार, युद्ध, नास्तिकता, विस्थापन जैसे मुद्दों पर जब औरत बोलती है तो उसका स्वाभाविक स्वर चुनौती वाला होता है। औरत होना उसके लिए पक्ष होना है। कहीं भी। कभी भी कविता में। दुनिया के साहित्य से चुनी इस संग्रह की कविताओं में प्रेम, समझ, हक, मैत्री, गन्ध, परिवेश, ख़ौफ़, भूगोल इत्यादि इस तरह गुँथे हुए हैं जैसे मिथक और पॉपकार्न, जैसे इन्द्रधनुष अगिया बैताल।
* मैं हूँ एक स्त्री/ कौन कह सकता है मैं शर-विद्या सीखना चाहती हूँ/मैं उस धूर्त और दयनीय ब्राह्मण/द्रोणाचार्य की मूर्ति भी नहीं बना सकती/क्योंकि वह पर पुरुष है/मैं एकलव्य नहीं बन सकती/मेरा अँगूठा है मेरे पति का /मैं शम्बूक भी नहीं बन सकती/क्योंकि मुझे एक बलात्कारी से गर्भ धारण करना है/एकलव्य और शम्बूक मैं तुम्हारे एकान्त से/ईर्ष्या करती हूँ/क्योंकि मैं एक स्त्री हूँ और ब्राह्मणों की दुनिया/भंग करना चाहती हूँ।
– शुभा
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| Binding | Paperback |
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| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |
अनामिका
जन्म : 1961 के उत्तरार्द्ध में मुजफ्फरपुर, बिहार।
शिक्षा : अंग्रेज़ी साहित्य से पी-एच.डी.।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य की लोकप्रिय प्राध्यापक, अनामिका के सात कविता-संकलन, पाँच उपन्यास, चार शोध-प्रबन्ध, छह निबन्ध-संकलन और पाँच अनुवाद बहुचर्चित हैं। इनके पाठकों का संसार बड़ा है। रूसी, अंग्रेज़ी, स्पेनिश, जापानी, कोरियाई, बांग्ला, पंजाबी, मलयालम, असमिया, तेलुगु आदि में इनकी कृतियों के अनुवाद कई पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी हैं। फ़िलहाल आप तीन मूर्ति में फेलो के रूप में सन्नद्ध हैं और यहाँ आपके शोध का विषय है : वीविंग अ नेशन : द प्रोटो-फेमिनिस्ट राइटिंग्ज इन उर्दू एंड हिन्दी।

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