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Description
कम से कम एक दरवाजा
हिन्दी की जानी-मानी कथाकार सुधा अरोड़ा ने स्त्री-जीवन से संबद्ध विभिन्न पक्षों पर गहरे सरोकार से साहित्य में अपनी पहचान कायम की है। उनका पहला कविता-संग्रह ‘कम से कम एक दरवाज़ा’ भी उनके इसी सरोकार की अभिव्यक्ति है। अधिकांश कविताओं की प्रेरणा किसी वास्तविक घटना से जुड़ी होने पर भी उनमें न भावावेग है, न भाव विह्वलता। बड़े थिराए अनुभव और भाव-संवलित मन से उन्होंने इन प्रसंगों को काव्य-पंक्तियों में गहरी निजता से आकार दिया है। इस संग्रह की कविताओं में बाहर और भीतर का संतुलन ही इसका आकर्षण है। स्त्री-जीवन में व्याप्त समय और समाज की तमाम दुरभिसंधियों को निजी तटस्थता से ग्रहण कर, निरावेश संलग्नता से व्यक्त कर ले जाने का कौशल इन्हें विशेष अर्थवत्ता प्रदान करता है। कविताओं में यथार्थ जीवन के कथात्मक प्रसंगों की गद्य लय और उनके प्रति लेखकीय संवेदना की काव्य लय का संयोग इन कविताओं को एक साथ जीवन-संबद्ध और मार्मिक बनाता है। कथाकार होने के कारण, हिन्दी गद्य पर लेखिका के सहज अधिकार से इन कविताओं में जो प्रवाह और पठनीयता पैदा हुई है वह इनकी लोकप्रियता में निश्चित रूप से सहायक होगी।
– डॉ. निर्मला जैन (प्रख्यात रचनाकार और चिंतक)
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Hardbound |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2015 |
| Pulisher |











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