Krantikari Aandolan
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क्रांतिकारी आन्दोलन
दो शब्द
1857 के सशस्त्र विद्रोह में पहली आहुति वीर मंगल पाण्डे ने बैरकपुर में फांसी पर झूल कर दी। इसके बाद मेरठ में 10 मई से शुरू हुए इस क्रांति यज्ञ में रानी झांसी, नानाजी पेशवा, तात्या टोपे, कुँवरसिंह, उधम सिंह, भगत सिंह आदि न जाने कितने राष्ट्रभक्तों ने प्राणों की आहुतियाँ देकर इस क्रांति-ज्वाला को प्रज्जवलित किया। जिन्होंने अपना सर्वस्व समर्पित करके, अपने प्राणों की आहुति देकर हमारे राष्ट्र को स्वाधीन कराया, उनके विषय में हमारी युवा पीढ़ी कुछ जानती ही नहीं है। नई पीढ़ी को यह भी पता नहीं है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का जन्मदाता वह अंग्रेज ह्यूम था, जिसने 1857 में इटावा के कलक्टर के नाते अपने हाथों से अनेक स्वाधीनता सेनानियों की हत्या की थी।
‘क्रांतिकारी आन्दोलन’ पुस्तक में जाने-अनजाने राष्ट्रभक्त क्रांतिकारियों के व्यक्तित्व-कृतित्व को गूँथने का प्रयास किया गया है। आशा है पाठकों को इससे भारत के क्रांतिकारी आन्दोलन की प्रमुख घटनाओं के विषय में संक्षिप्त जानकारी मिल सकेगी।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2011 |
| Pulisher |











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