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लल्लेश्वरी के वाख
लल्लेश्वरी के वाख : लल्लेश्वरी ने अपने समय के जीवन-दर्शन और अध्यात्म को लोकभाषा में संप्रेष्य बनाते हुए जन-जन तक पहुँचाया। उनका संवाद अपने समय के सभी मतों के ज्ञानियों और अध्यात्म-गुरुओं से समान रूप से था। अपनी इस संवादशीलता के कारण वे कश्मीर की सामासिक संस्कृति का प्रातिनिध्य करती हैं। वे अपनी आध्यात्मिक अनुभूतियों के कारण अपने समय के समाज के हर एक वर्ग में पूज्य भी मानी गई।
आचार्य राधावललभ त्रिपाठी द्वारा संपादित ‘लल्लेश्वरी के वाख’ के प्रस्तुत संस्करण में राजानक भास्कर द्वारा संस्कृत अनुवाद के लिए स्वीकृत पाठ स्वीकार किया गया है, जो ‘राजानक भास्करकृत लल्लेश्वरीवाक्यानि’ शीर्षक से श्रीनगर स्थित जम्मू-कश्मीर शोध विभाग द्वारा 1930 में प्रकाशित किया गया था। हिंदी अनुवाद अद्वैतवादिनी कौल ने किया है। प्रस्तुत अनुवाद मूल वाख का प्रतिपंक्ति शब्दशः अनुवाद है। प्रत्येक वाख के साथ विद्वान संपादक के द्वारा टिप्पणियाँ जोड़ी गई हैं, जिनमें ग्रियर्सन द्वारा स्वीकृत पाठ का राजानक भास्कर के पाठ से मिलान किया गया है। ज्ञानवर्धक संपादकीय इस संस्करण की श्रेष्ठता को बढ़ाता है। अनुवादक की भूमिका भी पठनीय है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher | |
| Pages |











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