Lavaris Saman Ka Kamra

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Lavaris Saman Ka Kamra

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₹299.00 ₹222.00

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Author: Amber Pandey

Availability: 5 in stock

Pages: 184

Year: 2026

Binding: Paperback

ISBN: 9789377370633

Language: Hindi

Publisher: Rajkamal Prakashan

Description

लावारिस सामान का कमरा

हिन्‍दी कहानी की कथा-वस्‍तु, भाषा और शिल्‍प आदि के वर्तमान ढर्रों से पूरी तरह मुक्त अम्‍बर पाण्‍डेय की ये कहानियाँ हिन्‍दी में एक सर्वथा अनूठी कथा का उद्घाटन करती हैं। जीवन के नितान्‍त अछूते कोनों से उठाए गए कथानक को उतने ही अछूते शिल्‍प में उत्कीर्ण करती ये कहानियाँ एक ऐसा आख्‍यान रचती हैं जो हमें एक साथ विस्मित और विचलित करता है। इनमें जब-तब हमारे निकट इतिहास और कल्‍पना का ऐसा अन्‍तर्गुम्‍फन है जो मानो दोनों से अलग और स्‍वायत्त एक तीसरी विधि या विधा में फलित होता है, तो जब-तब हमारी परिचित वास्‍तविकता लगभग अतियथार्थ प्रतीत होते शिल्‍प में रूपान्‍तरित होकर एक बिलकुल अपरिचित शक्‍ल में पुनराविष्‍कृत होती है। सबसे अधिक ध्‍यानाकर्षी है इन कहानियों की भाषा जो, एक बार पुन:, वर्तमान हिन्‍दी कहानी (बल्कि समूचे गद्य और कविता) की भाषा के सन्‍दर्भ में अद्वितीय है। इस भाषा की रचना हमारी सपाट रोज़मर्रा ज़ुबान को बहुत आकस्मिक किन्‍तु सहज ढंग से आई तत्‍सम शब्‍दावली से ‘जक्‍स्‍टापोज़’करने से होती है। यह सन्निधान (‘जक्‍स्‍टापोज़ीशन’) एक ऐसी, मानो अतियथार्थ, भाषा की रचना करता है जो एक अन्‍तर्निहित द्विस्‍तरीय वास्‍तविकता को स्‍पन्दित करती है : यथार्थ में ‘एक और तह’ का अहसास कराने वाली भाषा। दूसरी तरह से कहें तो, यह ‘डायलेक्‍ट’ का एक ‘ईडियोलेक्‍ट’ में रूपान्‍तरण है जो इन कहानियों की निर्मिति को ‘ईडियोसिंक्रेटिक’ रूप प्रदान करता है।

ये सारी चीज़ें मिलकर इन कहानियों की भू-रचना को बेहद विसमतल (‘टोपोलॉजिकल’) बनाती हैं। जिस पर चलते हुए हमारी गति बार-बार अवरुद्ध होती है, झटके खाती है। दूसरे शब्‍दों में हम आख्‍यान का निर्बाध पठन करते चले जाने के बजाय उसमें अपना रास्‍ता बनाते हुए चलते हैं : सिर्फ़ पढ़ते हुए नहीं बल्कि आत्‍मचेतन पठन करते हुए। यह सब कहने के बाद यह कहना ज़रूरी है कि इन कहानियों को पढ़ना पठन के अपने कोश में वास्‍तविकता के एक नितान्‍त अनन्‍य अवबोध को शामिल करते हुए उसे समृद्ध करना है।

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Authors

Binding

Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2026

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