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Description
महाभारत : महाकाव्य एवं राष्ट्र
‘महाभारत’ ने अपनी शुरुआत से ही इस उपमहाद्वीप में लाखों लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। भारत में, अनेक राजवंश आए और चले गए; धार्मिक सम्प्रदाय बने और मिट गए; दर्शन के विभिन्न मत आए और फिर उनकी जगह दूसरों ने ले ली, इसी तरह अनेक कला रूप भी एक समय पर चमकने के बाद अन्य कला-शैलियों के सामने मन्द पड़ गए—लेकिन ‘महाभारत’ हमेशा भारतीय कल्पना को रोमांचित करता रहा।
महाभारत की व्याख्याओं और टीकाओं की संख्या विस्मयकारी है। आख़िर वह कौन-सी चीज़ है जो महाभारत को ऐसा कालजयी जादू प्रदान करती है ? क्या इसके वे पौराणिक पात्र जो इस महाकाव्य को इतना मनमोहक बनाते हैं ? या फिर इसमें निहित दार्शनिक और आध्यात्मिक विचार जो पाठकों को चमत्कृत कर देते हैं ? या फिर ये सब तत्त्व मिलकर कुछ ऐसा प्रभाव पैदा करते हैं कि दुनिया-भर के विद्वान और पाठक इसकी तरफ़ खिंचे चले आते हैं ? और अन्ततः वह क्या है जिसके चलते पीढ़ियों से लाखों भारतीयों के अवचेतन मन पर इस महाकाव्य की ऐसी अविश्वसनीय पकड़ क़ायम है ?
मराठी, कन्नड़, असमिया, तमिल, उर्दू, गुजराती, बांग्ला और मलयालम सहित अनेक भाषाओं में अनूदित, जी. एन. देवी की यह पुस्तक महाभारत से जुड़े ऐसे ही सवालों का जवाब देती है—और यह भी बताती है कि क्यों यह महाकाव्य भारत के राष्ट्रीय महाकाव्यों में एक विशेष स्थान पर आज भी बना हुआ है ?
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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