- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
महात्मा
महात्मा उपन्यास अनेक पुरस्कारों से सम्मानित। दो समीक्षा ग्रन्थों को शिवाजी विश्वविद्यालय का उत्कृष्ट समीक्षा ग्रन्थ पुरस्कार। महात्मा फुले के जीवन और कार्य सम्बन्धी विषयों पर वक्ता के रूप में विख्यात।
सभी से समानता और सत्य से पेश आना, यही मनुष्य का धर्म है। धर्ममतों का हो-हल्ला मचाना पागलपन है। सम्पूर्ण मानवजाति जब ईश्वरीय इच्छा की निर्मिति है, तब मनुष्यों के लिए अलग-अलग धर्म कैसे हो सकते हैं ? मानवता, यही एक धर्म ईश्वर ने मनुष्य को दिया है। उसका आचरण करने के बजाय देवता के नाम पर उन्होंने खुद ही कुछ लिखा है और उसे परमात्मा का आशीर्वाद प्राप्त होने की झूठी अफवाहें फैलायी हैं। वे ही लोग मनुष्य और परमात्मा के बीच बिचौलिये बन बैठे हैं। जो सम्मान केवल ईश्वर को देना उचित है, उसे अपने लिए हथियाकर उन्होंने ईश्वर को गौणत्व प्रदान किया है। यही नहीं, बल्कि उन्होंने मनुष्यों के बीच भेदभाव की दीवारें खड़ी कर मनुष्य का भुट्टा बना डाला है। उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया है। अज्ञानी मनुष्य परमेश्वर के बजाय इन बिचौलियों के फेर में पड़ गया है। ईश्वर के बजाय वह इन दलालों से डरने लगा है… ये देवता, मन्दिर, ये बिचौलियों के जुल्म असली धर्मजीवन नहीं हो सकता। प्रत्येक धर्म की यही स्थिति है। असली धर्मविचार का लोप हो गया है। आज सारी मानव जाति के लिए एक समान हितकारी धर्म विचार बताने की जरूरत है। मनुष्य का धर्म-जीवन सुधर जाए तो उसके ऐहिक जीवन में सुधार होने में देर नहीं लगेगी। इसके लिए मनुष्य धर्म के प्रसार का कार्य हाथ में लेना चाहिए। व्यापक स्तर पर धर्मविषयक विचारों का प्रसार करने वाली संस्था की स्थापना करनी चाहिए… आज सभी के लिए एक समान हितकारी धर्ममार्ग उपलब्ध नहीं है। इसीलिए एक तो धर्मस्वातन्त्र्य होना चाहिए, या सभी लोग अपना सकें ऐसा धर्ममार्ग निर्माण करना चाहिए…
– इसी पुस्तक से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











Reviews
There are no reviews yet.