Manas Manthan-2 (Shri Hanuman Charitra)

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Manas Manthan-2 (Shri Hanuman Charitra)

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370.00 360.00

In stock

370.00 360.00

Author: Sriramkinkar Ji Maharaj

Availability: 4 in stock

Pages: 268

Year: 2021

Binding: Paperback

ISBN: 0000000000000

Language: Hindi

Publisher: Ramayanam Trust

Description

 

सम्पादकीय

आदरणीय पण्डित रामकिंकर उपाध्याय ने भारतीय विद्या भवन की नागपुर शाखा के तत्त्वावधान में नवम्बर, 1973 में ‘रामचरितमानस’ पर जो आठ व्याख्यान दिए थे, उन्हें संग्रहीत कर ‘मानस-मन्थन’ प्रथम रत्न के नाम से प्रकाशित किया गया था। लोगों ने उसे इतना अधिक पसन्द किया कि एक वर्ष के भीतर ही भारतीय विद्या भवन को उसका दूसरा संस्करण निकालने के लिए बाध्य होना पड़ा। साथ ही लोगों की यह भी माँग रही कि पण्डितजी द्वारा 1974 तथा 1975 में प्रदत्त व्याख्यानमालाएँ भी इसी प्रकार पुस्तकाकार में प्रकाशित की जाएं।

जिन्हें पण्डित रामकिंकरजी के प्रवचनों को सुनने का एक बार भी सुअवसर प्राप्त हुआ है। वे उनके प्रवचनों को सर्वदा सुनने के लिए लालायित रहते हैं और साथ ही उनकी यह भी इच्छा रहती है कि ये प्रवचन यदि लिपिबद्ध हो पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो जाएं, तो सदैव उनका लाभ मिलता रहे। वैसे पण्डितजी जितने प्रगल्भ वक्ता हैं, उतने ही प्रखर लेखक भी तथापि लेखक और प्रवचन में कुछ भिन्नता होती है। लेखक में व्यक्ति बुद्धिप्रधान हुआ करता है, जबकि प्रवचन में हृदयप्रधान और रसत्व तो हृदय का ही धर्म है, बुद्धि का नहीं। यही कारण है कि ‘मानस-मन्थन’ अपने ही ढंग की पुस्तक है, जिसमें पाठकों को विशेष रस की उपलब्धि होती है। इसे दृष्टिगत करते हुए नागपुर में पण्डितजी द्वारा 24 नवम्बर से 1 दिसम्बर, 1974 तक प्रदत्त आठ व्याख्यानों को ‘मानस-मन्थन’ द्वितीय रत्न के नाम से प्रकाशित करने की योजना बनी, जिसमें बहुमत का चरित का बड़ा ही सुन्दर विवेचन है। वैसे तो पण्डित कलकत्ते में 120 दिन तक प्रवचन करके भी ‘हनुमत् चरित’ की व्याख्या पूरी न कर सके, तथापि इन आठ दिनों की व्याख्यानमाला में उन्होंने जो रस उड़ेला है, वह जिज्ञासु और भावप्रधान पाठकों को आह्लाद और संतोष दोनों का हेतु है।

टेप में बन्द प्रवचनों को लिखना और उनका सम्पादन करना कितना दुस्साध्य कार्य है यह वे ही समझ सकते हैं, जिन्होंने यह कार्य किया है। इसमें असीम धैर्य और सर्वोपरि, निष्ठा की आवश्यकता होती है। रायपुर के रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द आश्रम के ही मानससेवी कार्यकर्ता पं. हरिप्रसाद द्विवेदी ने इन व्याखानों को टेप से लिखने में जिस असीम धैर्य का परिचय दिया है, वह सचमुच श्लाघनीय है और हमारे धन्यवाद के पात्र हैं।

इस व्याख्यानमाला का उद्घाटन करते हुए भारत के केन्द्रीय स्वास्थ्य मन्त्री डॉ. कर्णसिंह जी ने जो उद्बोधक भाषण दिया था, वह इस व्याख्यासंग्रह के लिए उत्कृष्ट भूमिका स्वरूप है। अतः उसे भूमिका के स्थान पर रखा गया है।

श्रीहनुमान जी की कृपा से ही पण्डितजी के इन व्याख्यानों का ग्रन्थ के रूप में सम्पादकीय सम्भव हो सका है। आशा है, ‘मानस-मन्थन’ का यह द्वितीय रत्न भी प्रथम रत्न की भाँति लोकप्रिय होगा और रामकथारस-रसिकों द्वारा समादृत होगा।

– स्वामी आत्मानन्द

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Authors

Binding

Paperback

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Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2021

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