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Description
मन का युद्ध और अन्य कविताएँ
भूमिका
कुछ सपने ऐसे होते हैं जो आपके जीवन की दिशा बदल देते हैं और ऐसा ही एक सपना मैंने भी देखा था, जब मैंने लिखना शुरू किया था और उसी सपने की शुरुआत है यह किताब। साल 2009 से मैंने अपने लेखन की शुरुआत की जिसका बहुत बड़ा श्रेय मैं गुरुदत्त जी, राज कपूर जी, ऋषिकेश मुखर्जी जी और इम्तिआज अली जी की फिल्मों को देना चाहूँगा। इन्हीं सब महान शख्शियतों के चलते मैंने अपनी भावनाओं और अपने आस-पास हो रही चीज़ों को देखने का नज़रिया बदला फिर उसके बाद से जो सफर शुरू हुआ उसका एक छोटा सा अंश इस किताब के रूप में आप सभी तक पहुँचा रहा हूँ।
हमारे मन के भीतर अनेकों प्रकार की भावनाओं का जो संघर्ष चलता रहता है उन्हीं सब भावनाओं के अंशों को शब्दों के साथ पिरो कर कागज पर उतारने की छोटी सी कोशिश है यह किताब। मैंने अपने आसपास जिस तरह के लोग और समस्याओं को देखा है उन्हीं सारी चीज़ों को कविताओं की मदद से मैंने अपनी इस किताब में उतारने की कोशिश की है। विनोद कुमार शुक्ल जी, दुष्यंत कुमार जी और शिव कुमार बटालवी जी की लिखी कविताओं ने मुझे हिंदी कविताओं की तरफ और अधिक आकर्षित किया। कविताओं ने मेरे जीवन में उस सारे पलों में मेरे साथ दिया जिस वक़्त मैंने अपने जीवन में शायद सबसे अधिक कठिनाई का अनुभव किया और हिंदी साहित्य के इन महान कवियों से प्रेरणा पाकर ही मैंने इन कविताओं को लिखा है।
मेरा मानना है कि अपने अनुभवों को लिखना जितना सरल लगता है उससे कई गुना ज्यादा कठिन कार्य है। मेरी शुरुआती दौर की इन कविताओं को आप सभी पाठकों के सामने लाने में मुझे जितना हर्ष प्राप्त हो रहा है आशा करता हूँ आपको भी इन्हें पढ़कर उतनी ही प्रसन्नता होगी।
– राज कुमार बैरवा ‘मुसाफ़िर‘
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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