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Description
मिश्रबंधु विनोद
इस ग्रंथ को हम तीन भाइयों ने मिलकर बनाया है, अत: लेखकों के लिये सदैव हम, हम लोग आदि शब्द इसमें मिलेंगे। बहुत स्थानों पर लेखकों द्वारा ग्रंथादि देखे जाने या अन्य कार्य किए जाने के कथन हैं। इन स्थानों पर ‘हम’ शब्द से सब लोगों के द्वारा उसके किए जाने का प्रयोजन निकलता है, परंतु हम तीनों में से किसी ने भी जो कुछ किया है, उसका वर्णन हमने ‘हम’ शब्द से किया है । एक–एक, दो–दो मनुष्यों के कार्यों को अलग लिखने से ग्रंथ में अनावश्यक विस्तार होता है और भद्दापन आता। फिर अधिकतर स्थानों पर सभी की राय मिलाकर लेख लिखे गये हैं। तीनों लेखकों के कार्यों को अलग–अलग दिखाना हमें अभीष्ट भी न था। ग्रंथ में जहाँ एक संवत् के नीचे कई नाम आए हैं, या अज्ञात अथवा वर्तमान समय में बिना संवत् लिखे ही नाम लिखे गये हैं, वहाँ वे अकारादि–क्रम से लिखे हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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