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Pani Jo Patthar Peeta Hai
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₹160.00 ₹150.00
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Author: Anamika
Pages: 112
Year: 2012
Binding: Hardbound
ISBN: 9788177142068
Language: Hindi
Publisher: Prakashan Sansthan
पानी जो पत्थर पीता है
‘पहले बरतन, फिर मन-स्त्रियाँ माँजे चली जा रही हैं’- अनामिका कहती हैं। उनका मानना है कि अन्तर्वैयक्तिक सम्बन्धों में सत्याग्रह को एक नयी धार देता है स्त्री-विमर्श ! ग्लोरियस क्रांति के बाद का सर्वाधिक अहिंसात्मक आंदोलन यही है जो मानकर चलता है कि एक दमन-चक्र का जवाब दूसरा दमन-चक्र नहीं है किन्तु यह बात भी सच है कि ‘स्पेस’ अपने-आप कोई देता नहीं, खुद बढ़कर ले लेना पड़ता है-‘साम-दाम’ आजमा चुकने के बाद ही ‘दण्ड-भेद’ की जरूरत पड़ती है !
ललित निबन्धों की लुप्तप्राय विधा यहाँ नयी साँसें भरती जान पड़ती है ! जानदार भाषा, सहज रसनिक्षेप के साथ पते की बात कहने की कला अनामिका ने साध ली हैं। दैनन्दिन जीवन की विडम्बनात्मक स्थितियाँ मार्मिक स्ट्रोक्स और बतरस के साथ ये सामने रखती हैं !
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2012 |
| Pulisher |
अनामिका
जन्म : 1961 के उत्तरार्द्ध में मुजफ्फरपुर, बिहार।
शिक्षा : अंग्रेज़ी साहित्य से पी-एच.डी.।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य की लोकप्रिय प्राध्यापक, अनामिका के सात कविता-संकलन, पाँच उपन्यास, चार शोध-प्रबन्ध, छह निबन्ध-संकलन और पाँच अनुवाद बहुचर्चित हैं। इनके पाठकों का संसार बड़ा है। रूसी, अंग्रेज़ी, स्पेनिश, जापानी, कोरियाई, बांग्ला, पंजाबी, मलयालम, असमिया, तेलुगु आदि में इनकी कृतियों के अनुवाद कई पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी हैं। फ़िलहाल आप तीन मूर्ति में फेलो के रूप में सन्नद्ध हैं और यहाँ आपके शोध का विषय है : वीविंग अ नेशन : द प्रोटो-फेमिनिस्ट राइटिंग्ज इन उर्दू एंड हिन्दी।

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