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Pratinidhi Kavitayein : Ramdarash Mishra
₹99.00 ₹75.00



₹99.00 ₹75.00
₹99.00 ₹75.00
Author: Ramdarash Mishra
Pages: 150
Year: 2022
Binding: Paperback
ISBN: 9789394902428
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
प्रतिनिधि कविताएँ : रामदरश मिश्र
लगभग एक शताब्दी वय के हिन्दी विश्व के श्रेष्ठ कवि रामदरश मिश्र का कवि व्यक्तित्व प्रारम्भ से ही अभिभूत करने वाला और हिन्दी की चिन्तन प्रक्रिया और कविता के सौन्दर्यबोध को सींचने वाला रहा है। उन्हें मिले लगभग सभी बड़े पुरस्कार भी इस बात की गवाही देते हैं। कविता की बुनियादी ज़मीन गीत, कवित्त, मुक्तक में निष्णात रामदरश जी ने समय रहते नई कविता के स्थापत्य की कमान हाथ में ले ली थी और धीरे-धीरे वे अभिव्यक्ति और अन्दाजे बयां के उस शिखर पर पहुँच गए जहाँ अनुभूति और संवेदना का रसायन गाढ़ा हो उठता है। उनकी कविता में सारे मौसम अपने सौन्दर्य और संघर्ष के साथ सामने आते हैं। इसलिए आश्चर्य नहीं कि ऋतुओं पर लगभग सबसे ज्यादा कविताएँ उन्होंने लिखी हैं। ‘धरती छंदमयी होगी’ का स्वप्न देखने वाला यह कवि शताब्दी-भर के रचनात्मक समय को अपनी छाती से लगाए जैसे उसकी धड़कनों को बहुत पास से सुन रहा हो। ‘पथ के गीत’ से लेकर ‘समवेत’ तक की उनकी कविता यात्रा कविता की ऊर्ध्वमुखी यात्रा है। उसमें हमारी कवि परम्परा के साथ-साथ पिछली शताब्दी और इस सदी का समय प्रतिबिम्बित होता दिखता है। उनकी कविताओं में विश्वबन्धुता है, विराट का स्पन्दन है, जीवन के एक-एक पल को जीने की चाहत है। उनकी खूबी है कि वे एक कौंध, एक पुलक-भर से कविता रच लेते हैं और यही कौंध, पुलक, सुख, विषाद, विडम्बना और प्रश्नाकुलता उनकी कविताओं के क्रोमोज़ोम में अनुस्यूत है। यही वह कवि का सतत गंवई गार्हस्थ्य है जो यह कहने में गर्व का अनुभव करता है कि ‘हम पूरब से आए हैं’। सच कहें तो इन कविताओं में उनका समूचा कवि व्यक्तित्व समाहित है।
— ओम निश्चल
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
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| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |
रामदरश मिश्र
जन्म : 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर (उ० प्र०) जिले के डुमरी गांव में।
शिक्षा : एम०ए०, पी-एच०डी०
सर्जनात्पक रचनाएँ : ‘पथ के गीत’, ‘बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ’, ‘पक गई है धूप’, ‘कंधे पर सूरज’, ‘दिन एक नदी बन गया’, ‘मेरे प्रिय गीत’, ‘जुलूस कहाँ जा रहा है ?’, ‘रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ’, ‘आग कुछ नहीं बोलती’, ‘शब्द सेतु’, ‘बारिश में भीगते बच्चे’, ‘ऐसे में जब कभी’, ‘आम के पत्ते (काव्य-संग्रह), ‘हंसी ओठ पर आँखें नम हैं’, ‘बाजार को निकले हैं लोग’ (ग़ज़ल-संग्रह) ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’, ‘बीच का समय’, ‘सूखता हुआ तालाब’, ‘अपने लोग’, ‘रात का सफर’, ‘आकाश की छत’, ‘आदिम राग’ (बीच का समय), ‘बिना दरवाजे का

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