Prem Ka Abhyas Nahi Hota

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Prem Ka Abhyas Nahi Hota

Prem Ka Abhyas Nahi Hota

199.00 149.00

In stock

199.00 149.00

Author: Preetam Singh

Availability: 5 in stock

Pages: 92

Year: 2025

Binding: Hardbound

ISBN: 9789355369116

Language: Hindi

Publisher: Bodhi Prakashan

Description

प्रेम का अभ्यास नहीं होता

प्राक्कथन

ये संसार पग-पग पर प्रेम करना सिखाता है किन्तु हम पग-पग ईर्ष्या का अनुकरण करते हैं। कुछ बिरले लोग प्रेम में पड़ते हैं और प्रेम ही उनका संसार बन जाता है। एक नन्हे शिशु की किलकारी मां के लिए प्रेम ही तो है। जब मैंने अपने चारों और संवेदनाओं की कमी महसूस की तो अंगुलियों ने स्वयं कलम पकड़ ली।

प्रेम करना अपने आप में सुखद अनुभूति है लेकिन प्रेम को व्यक्त करना भी आवश्यक है। प्रश्न यह उठता है कि प्रेम को व्यक्त कैसे किया जाए ? जब प्रेम को व्यक्त करने की बात आती है तो हम बगलें झांकने लगते हैं। प्रेम के दो शब्द कह देने मात्र से क्या प्रेम व्यक्त हो जाता है ? निस्संदेह नहीं। प्रेम को व्यक्त करने के लिए कभी-कभी न तो शब्द और न मौन काम आता है कभी-कभी केवल समय ही प्रेम को महत्वपूर्ण बनाता है ये निरंतर बीतता समय ही मेरी प्रेरणा बना।

दुनियादारी की लाखों बातों में अभ्यास के पश्चात परीक्षा का क्रम होता है। प्रेम के संदर्भ में क्या अभ्यास ज़रूरी है ? ये सब मैं आप लोगों पर छोड़ता हूँ कि प्रेम का अभ्यास किया जाना चाहिए या नहीं ? प्रेम के अनेक रंगों पर आधारित इस पुस्तक को लिखने में एक वर्ष से अधिक का समय लगा, जिसका मूल कारण मेरा कई बार निराशा की गहराई में स्वतः पहुँच जाना रहा। किन्तु जैसा कि इस संसार में होता आया है हर रात की एक सुबह होती है, इस तरह एक सुबह वो भी आई जब कविताएं पूर्ण हुई और आज यह पुस्तक के रूप में आपके हाथों में है। आशा करता हूँ यह पुस्तक आपके मन के भीतर प्रेम को और अधिक निखार देगी। आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।

राजस्थान साहित्य अकादमी का विशेष आभार जिन्होंने ‘पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना’ में मेरा काव्य-संग्रह स्वीकृत किया। बोधि प्रकाशन के संचालक मायामृग जी को सहृदय धन्यवाद जिन्होंने पुस्तक प्रकाशन दायित्व निभाकर इसे पाठकों तक पहुँचाने में सहयोग किया है। डॉ. शिल्पा जैन सुराणा दीदी को धन्यवाद जिन्होंने मेरी इस पुस्तक के लिए भूमिका लिखी और जिनके आशीर्वाद से लेखन में हर कदम पर सहायता मिली। आशा करूँगा कि भविष्य में भी अपना आशीर्वाद मुझ पर बनाएं रखेंगी।

– प्रीतम सिंह

Additional information

Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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