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Description
धूप के हस्ताक्षर
पन्ना त्रिवेदी का संग्रह ‘धूप के हस्ताक्षर’ कई मायनों में विशिष्ट है। पन्ना त्रिवेदी की कविताओं की केन्द्रीय संवेदना में समय, समाज और सत्ता प्रतिष्ठान को नीयत के विरुद्ध एक उत्कट विकलता है जो हमें कवयित्री की मानसिक बुनावट, उनकी सादगी के सौन्दर्य, उनकी चिन्ता और भाव प्रवणता से अवगत तो कराती ही हैं उनके काव्यशिल्प को, उनकी काव्यभाषा को भी तय करती हैं। पन्ना त्रिवेदी यों तो प्रमुख रूप से गुजराती साहित्य की प्रतिष्ठित कहानीकार हैं, परन्तु उनकी गुजराती कविताओं ने भी उन्हें अपना एक स्थान दिलाया है। इस दृष्टि से गुजराती के अलावा पन्ना त्रिवेदी की हिन्दी में भी सृजनात्मक उपस्थिति हिन्दी के भूगोल की विविधता को और अधिक विस्तार देती हैं।
कविताओं में प्रतीक, रूपक, बिम्ब-विधान, उपमाये
और तुलनाएँ सहज ही कविता के पाठक का ध्यान
आकर्षित करती हैं। इसलिए नहीं कि कवयित्री कोई
सायाश चमत्कार पैदा करती हैं, बल्कि उनमें
सौन्दर्यबोध की भव्यता मिलती है।
वे जानने लगते हैं
जाति ही नहीं भाषा से भी हो सकती है राजनीति
जिसमें कोई चुनाव नहीं होता
जिसमें कोई प्रत्याशी नहीं होता
खड़ा होता है एक पूरा समूह
जो जीत जाता है पुरुषत्व के बल पर
या आभिजात्य के नाम पर
भाषा धकेल सकती है
किसी को भी हाशिये के हाशिये पर
बनाये रखती है स्त्री को मात्र स्त्री
अछूत को मात्र अछूत सदैव के लिए
वह नहीं बनने देती मुख्यधारा का इंसान उसे
– इसी पुस्तक से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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