Ramdarash Mishra Rachana Sanchayan
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Description
रामदरश मिश्र रचना संचयन
रामदरश मिश्र (जन्म : 1924, डुमरी गोरखपुर) हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि-कथाकार, गद्यलेखक एवं आलोचक। अध्यापन की पहली नौकरी गुजरात की एमएस यूनिवर्सिटी बड़ौदा के दो महाविद्यालयों में 1964 में। दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े और 1990 में प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त। कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, यात्रावृत्त, निबंध, डायरी, आत्मकथा आदि विधाओं में आपकी सौ से अधिक कृतियाँ प्रकाशित हैं। रामदरश मिश्र को न तो प्राचीन से मोह है और न आधुनिकता से दूरी। जीवन से जुड़े सारे उपक्रम उनके लेखन को उर्वर बनाते हैं। इसी तरह विधाओं से भी आपका कोई पूर्वाग्रह नहीं है। कविता में आपने डेढ़ दर्जन से ज़्यादा कृतियाँ दीं तो ग़ज़लों के भी कई संग्रह आए। आपकी कविताओं का संसार व्यापक है। कवि के आत्मसंघर्ष की खुशबू तो इन कविताओं से आती ही है, बसंत, वर्षा, ग्रीष्म और ऋतुओं के सौंदर्यबोध, मानवीय राग-अनुराग, बाढ़, आपदा विभीषिका से गुजरते गाँव-समाज, जीव-निर्जीव सब तरह की इकाइयों से आपने अपनी रचनात्मकता को निर्मित किया है। सातवें दशक में आप कहानी और उपन्यास रचना की ओर मुड़े तथा पानी के प्राचीर (1969) से कथा की दुनिया से प्रवेश किया। उपन्यास जल टूटता हुआ ने आपको कथा लेखन में व्यापक ख्याति दी। नवें दशक में गुजरात के अनुभवों पर आपका उपन्यास दूसरा घर आपके औपन्यासिक लेखन का एक दूसरा बड़ा मोड़ साबित हुआ। आपकी रचनाओं में नए संवत्सर की लय है, जिजीविषा है, संघर्ष की दास्तान है तथा स्वाभिमानी मनुष्य तथा शोषण-अन्याय एवं पक्षपात रहित समाज के निर्माण का स्वप्न और संकल्प है। आपको अपने व्यापक लेखन के लिए दो दर्जन से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिनमें प्रमुख हैं-साहित्य अकादेमी पुरस्कार, सरस्वती सम्मान, व्यास सम्मान, भारत भारती सम्मान एवं हिंदी अकादमी दिल्ली का शलाका सम्मान आदि।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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