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Description
राममोहन
स्वातंत्र्योत्तर भारत में राममोहन एक निडर और महत्त्वाकांक्षी युवक है, जिसे अपनी जातिगत सीमाओं का आधिपत्य स्वीकार नहीं। वह ऐसे लक्ष्यों को साधने की ओर उन्मुख होता है जो उसके जैसी सामाजिक पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए सामान्यतया अगम्य हैं। किन्तु चुनौती कितनी ही आक्रान्तकारी क्यों न हो और रास्ता कितना ही बीहड़, राममोहन का दुर्निवार आशावाद हथियार डालने को तैयार नहीं। फिर उसे यह भी एहसास होता है कि राजनीति या अफसरशाही की ताकत के बिना भारत में आत्मसम्मान के साथ जीवन बसर करना एक टेढ़ी खीर है। एक अवसर पर जब गुलाब सिंह उसे एक गुण्डे के हाथों अपमानित होने से बचाता है तो वह हिंसा के महत्त्व का भी कायल हो जाता है। राजनीति और साहित्य के अलावा राममोहन के व्यक्तित्व का एक महत्त्वपूर्ण पहलू और भी है: उसकी अदम्य यौनाकांक्षा, जिसकी तसकीन के लिए वह सदैव सजग और प्रयत्नशील रहता है।
आजादी के लगभग पच्चीस वर्षों के कालखण्ड की पृष्ठभूमि पर रचा गया यह उपन्यास प्रान्तीय उत्तर भारत की तत्कालीन राजनीतिक उठापटक और सामाजिक स्थितियों का जीवन्त चित्रण है एवं अपने मुख्य पात्रों की जिन्दगियों के चढ़ाव उतार का एक बेहद रोचक, मनोरंजक और विचारशील पर्यवलोकन।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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