Sahmi Sahmi Sadi
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Description
सहमी सहमी सदी
सीता जी ने साढ़े तीन माह
अशोक वाटिका अर्थात
एकांतवास करके
कोरोना से भी खतरनाक
रावण के अंत की इबारत लिखी थी
इस अंतराल में उन्हें
अपनों में सिर्फ
हनुमान जी की शक्ल दिखी थी
सीता की इस तपस्या का ही
बल था कि
आततायी रावण का अंत हो गया
रावण वध हुआ तो
पूरे देश का मौसम बसन्त हो गया
आधुनिक काल के
वीर सावरकर ने सालों साल
जिंदगी काला पानी की जेल में
अकेले कोठरी में बिताई थी
तब कहीं अंग्रजों से
मुक्ति मिल पाई थी
सोचो हम आप क्या किसी
और दुनिया से आये हैं
हम सब भी तो इसी
भारत की मिट्टी के जाए हैं
तो फिर कुछ दिनों के
लॉकडाउन से न घबराएं
धैर्य से घरों में रह कर
मिट्ठी का कर्ज चुकाएं
शत्रुबध तक बाहर न आएं
करोना-रावण फिरंगी को जला कर ही
विजय दिवस का जश्न मनाएं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |











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