Samudrik Gyan Panchangule Sadhana
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Description
सामुद्रिक ज्ञान और पंचांगुली साधना
‘Palmistry is an organised knowledge’ पाश्चात्य विद्वान स्पेन्सर का कथन सत्य के कितना समीप है, यह बात कोई हस्तरेखा विद्वान ही समझ सकता है।
ईश्वर अथवा प्रकृति ने अनेक गोपनीय संकेत हाथ की इन टेड़ी-मेड़ी रेखाओं में छिपा दिये हैं। मानव जिस प्रकार जंगलों से निकलकर आज गलियों में आ गया है। यह उसके विकास की एक लम्बी यात्रा थी।
इसी प्रकार ‘सामुद्रिक शास्त्र’ पहले केवल ऋषि-मुनियों का ही था, शनैः-शनेः समाज के मध्य से गुजरता हुआ आज फुटपाथ तक आ गया है। आज हस्तरेखा विज्ञान का चलन सबसे अधिक है। कॉलिज का होस्टल हो अथवा किसी व्यापारी का व्यापार स्थल, हस्तरेखा देखने का चलन सब स्थानों पर समान रूप से पाया जाता है।
प्रश्नकर्त्ता सबसे पहले हाथ आगे करता है, फिर जन्म कुण्डली निकालता है। प्रश्न कुण्डली का क्रम सबसे बाद में आता है।
मस्तिष्क के आदेशों, निर्देशों का पालन सबसे पहले हाथ करता है। यह इतनी शीघ्रता से होता है कि मशीन भी पीछे रह जाती है। शरीर की हर क्रिया को मस्तिष्क संभालता है। डाक्टर भी ‘फिजिकल डैथ’ से अधिक महत्व ‘क्लिनिकल डैथ’ (मस्तिष्क की मृत्यु) को देते हैं। मस्तिष्क और हाथ का परस्पर गहरा सम्बन्ध है। प्रारब्ध, कर्म के साथ-साथ मस्तिष्क भी रेखाएं घटाने और बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान करता है।
शिशु की जीवन के लिए यात्रा माता के गर्भ से प्रारम्भ होती है। नक्षत्र, लगन, हाथ की रेखाओं के अनुसार उसका जीवन बनता है। प्रकृति का यह कैसा विचित्र सिद्धांत है, जिस नक्षत्र में गर्भाधान हुआ है, उसी नक्षत्र में शिशु का जन्म होता है। मान लें रोहिणी नक्षत्र में गर्भाधान हुआ हैं तो ठीक 280 दिन लगभग छः घंटे बाद उस शिशु का जन्म होगा। जन्म होने के उपरान्त लगभग इतने ही समय वह माता का स्तनपान करेगा। इससे दुगने समय के उपरान्त उस शिशु का मस्तिष्क, मांस-मज्जा पुष्ट होकर अपने भविष्य की तैयारी और कर्मों को भोगने में जुट जाता है।
अपनी बात को और आगे बढ़ाने से पहले ब्रह्मा द्वारा रचित और महर्षि नारद द्वारा पढ़ी गयी हस्तरेखा के विषय में एक प्रसिद्ध दृष्टांत प्रस्तुत है।
एक साधु तपोभूमि हरिद्वार में नियमित भीख मांगने आता था। वह भीख मांगने के साथ-साथ यह भी कहता जाता था, “हाय ! तू गिर क्यों न पड़ी ?”
हरिद्वार निवासी न तो इस प्रश्न को समझ पाते थे और न ही उन्हें इसका कोई समुचित उत्तर ही सूझता था। साधु का यह वाक्य बेतरह चर्चा का विषय बन गये।
एक दिन वह साधु फिर भीख मांगता हुआ आया और कहने लगा, “हाय ! तू गिर क्यों न पड़ी ?” उसकी यह बात सुनकर एक संत कुटिया से बाहर आया और बोला, “महाराज ! वह तो चल चुकी।”
यह सुनकर साधु पथरा गया। उसे अपने प्रश्न का उचित उत्तर मिल गया था। वह वहां से चला गया।
इसके बाद किसी ने उसे वहां भीख मांगते नहीं देखा।
कई माह बीत गए। कुछ निवासी उस संत के पास गये और पूछा, “महाराज ! उस दिन आपने उसे ऐसा क्या उत्तर दिया, जो उसने इधर आना ही बंद कर दिया।
वह संत बोले, “नगर निवासियों ! वह साधु भीख मांगना अच्छा नहीं समझता था, पर भाग्य के सामने विवश था, इसलिए ब्रह्मा से बार-बार प्रश्न करता था कि जब वह उसकी ‘भाग्य रेखा’ और ‘कर्म रेखा’ बना रहे थे, तब कलम गिर क्यों न पड़ी ? जो आज मुझे इस
अपमानजनक राह पर चलना पड़ा और यह निकृष्ट कार्य करना पड़ रहा है। मैंने तो उसे केवल इतना बतला दिया था, “अरे ! कलम तो तब तक चल चुकी थी।’’ वह अपने भिक्षाटन का कारण समझ गया, अस्तु चला गया।
करतल पर अंकित रेखाएं और कुछ नहीं केवल आपके भूत, भविष्य और वर्तमान का हिसाब हैं, जो ब्रह्मा ने अपनी संकेतात्मक भाषा में लिख दिया है।
| अनुक्रमणिका | ||||
| विषय | पृष्ठ संख्या | |||
| 1. विषय प्रवेश है | 9 | |||
| 2. हाथ का आकार-प्रकार | 14 | |||
| 3. चित्र-हाथ में जानने योग्य प्रमुख बातें | 15 | |||
| 4. चित्र-विभिन्न प्रकार के हाथों का वर्गीकरण | 21 | |||
| 5. अंगूठा तथा अन्य कुछ लक्षण | 25 | |||
| 6. नाखून | 28 | |||
| 7. चित्र-विभिन्न प्रकार के नाखून और अंगुलियां | 29 | |||
| 8. अंगुलियां | 31 | |||
| 9. चित्र-अंगुलियों के विभिन्न प्रकार | 32 | |||
| 10. ग्रह क्षेत्र | 36 | |||
| 11. चित्र-हाथ में विभिन्न ग्रहों की स्थिति | 37 | |||
| 12. हाथ की रेखाएँ | 40 | |||
| 13. चित्र-हाथ में विभिन्न रेखाओं की स्थिति | 41 | |||
| 14. जीवन रेखा | 42 | |||
| 15. भाग्य रेखा | 53 | |||
| 16. मस्तिष्क रेखा | 63 | |||
| 17. हृदय रेखा | 74 | |||
| 18. सूर्य रेखा | 82 | |||
| 19. स्वास्थ्य रेखा | 86 | |||
| 20. विवाह रेखा | 90 | |||
| 21. सन्तान रेखा | 97 | |||
| 22. अन्य रेखाएं | 101 | |||
| 23. यात्रा रेखाएं | 102 | |||
| 24. शीर्ष रेखा | 103 | |||
| 25. जिगर रेखा | 103 | |||
| 26. प्रभावी रेखाएं | 103 | |||
| 27. मणिबन्ध | 104 | |||
| 28. अतीन्द्रिय ज्ञान रेखा | 104 | |||
| 29. काम रेखा | 104 | |||
| 30. प्रवर्त रेखा | 105 | |||
| 31. ज्ञान रेखा | 105 | |||
| 32. धन प्राप्ति रेखा | 105 | |||
| 33. मस्तक रेखाएँ | 106 | |||
| 34. चित्र-चेहरे पर मस्तक रेखाएँ | 107 | |||
| 35. चन्द्र रेखा, मंगल रेखा | 108 | |||
| 36. शंख, चक्र, सीप | 109 | |||
| 37. हाथ पर पाये जाने वाले चिन्ह | 111 | |||
| 38. पुरुष शरीर लक्षण | 112 | |||
| 39. जंघा, बाल | 112 | |||
| 40. चित्र-पुरुष शरीर लक्षण (जंघा-पिंडली) | 113 | |||
| 41. कमर, नाभि | 114 | |||
| 42. चित्र-पुरुष शरीर लक्षण (कमर) | 115 | |||
| 43. कुक्षि, पैर | 116 | |||
| 44. चित्र-विभिन्न प्रकार के पैर | 117 | |||
| 45. उदर (पेट) | 118 | |||
| 46. चित्र-पुरुष पेट लक्षण | 119 | |||
| 47. वक्ष, स्कन्ध (कन्धे) | 120 | |||
| 48. चित्र-पुरुष वक्ष लक्षण | 121 | |||
| 49. कक्षा (कांख), बाहु (भुजा) | 122 | |||
| 50. चित्र-पुरुष भुजा लक्षण | 123 | |||
| 51. पृष्ठ (पीठ) | 124 | |||
| 52. स्त्री लक्षण | 125 | |||
| 53. कण्ठ, चिबुक तथा हनु | 125 | |||
| 54. चित्र-स्त्री शरीर लक्षण (कण्ठ) | 126 | |||
| 55. चित्र-स्त्री शरीर लक्षण (चिबुक) | 127 | |||
| 56. कपोल, मुख | 128 | |||
| 57. चित्र-स्त्री मुखाकृति लक्षण | 129 | |||
| 58. चित्र-स्त्रियों के अधर लक्षण | 131 | |||
| 59. अधर, ओष्ठ, दांत | 133 | |||
| 60. चित्र-विभिन्न प्रकार के दांत | 134 | |||
| 61. जिह्वा, तालु | 135 | |||
| 62. नासा (नाक), छींक | 138 | |||
| 63. चित्र-विभिन्न प्रकार की नाक | 139 | |||
| 64. नेत्र | 140 | |||
| 65. चित्र-विभिन्न प्रकार की आंखें | 141 | |||
| 66. आंखों की बरौनी | 143 | |||
| 67. कर्ण (कान) | 144 | |||
| 68. सर्वांग लक्षण | 145 | |||
| 69. ठोड़ी और कंठ के बीच लटकता मांस | 146 | |||
| 70. चिपका तालुवा | 146 | |||
| 71. चित्र-शरीर सर्वांग लक्षण (एक) | 147 | |||
| 72. बाहर निकला कंठ, बदन पर बाल | 148 | |||
| 73. छातियां, पीठ पर मस्सा, सुन्दर होंठ | 149 | |||
| 74. चित्र-शरीर सर्वांग लक्षण (दो) | 150 | |||
| 75. पतले होंठ, रोमहीन छाती, गाल पर मस्सा | 151 | |||
| 76. पतला पेट, पेट पर सलवटें, पेट या छाती पर तिल और मस्सा | 152 | |||
| 77. छोटी और मोटी गर्दन, पतली लम्बी गर्दन गर्दन के पीछे सलवटें, उठा हुआ सीना | 153 | |||
| 78. चित्र-शरीर सर्वांग लक्षण (तीन) | 154 | |||
| 79. भरी नाभि, उभरी नाभि, मोटा पेट | 155 | |||
| 80. तालुआ, गहरी नाभि, सूखी हड़ीली अंगुलियां | 156 | |||
| 81. अधिक अंगुलियां, भारी होंठ | 157 | |||
| 82. ऊपर के दांत, दबा हुआ, उठा हुआ दांत | 158 | |||
| 83. उठा हुआ कुब्ब, संचित धन | 159 | |||
| 84. चित्र-शरीर सर्वांग लक्षण (चार) | 160 | |||
| 85. हाथ में तिल, भोगेन्द्रिय, आंखों की पुतली | 161 | |||
| 86. पतली जंघा, स्थूल जंघा, भोगेन्द्रिय पर तिल, झुकाव | 162 | |||
| 87. मोटी टांगें, लंगड़ी टांगे | 163 | |||
| 88. स्त्रियों के मुख पर मूछों के चिन्ह | 163 | |||
| 89. बड़े दांत, उठे दांत, टेढ़े-मेढ़े दांत, दांतों में छिद्र | 164 | |||
| 90. नासिका में छोटे छिद्र, लम्बी ठोड़ी | 165 | |||
| 91. ठोड़ी में गड्ढा, बुद्धि, सुखस्थान, स्फुरण | 166 | |||
| 92. चरण पादुका लक्षण | 167 | |||
| 93. शुभ-अशुभ चिन्ह | 174 | |||
| 94. चिन्ह एक दृष्टि में | 184 | |||
| 95. पंचागुली साधना | 193 | |||
| 96. काल ज्ञान मंत्र | 215 | |||
| 97. अन्त में | 221 | |||
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2013 |
| Pulisher |











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