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Description
संस्कृति के आयाम
यह पुस्तक संस्कृति, संस्कार और लोकमंगल की त्रिभुजीय संरचना के इर्द-गिर्द बुना एक सांस्कृतिक दस्तावेज है, जो तीन स्वतंत्र अध्यायों का एक संग्रह है। कहने को ये तीनों अध्याय अपने आप में स्वतंत्र हैं, पर कहीं-न-कहीं ये अपने अंतःस्पंदन में अंतर्गुफित हैं। लोकमंगल की स्थापना में शास्त्रोक्त संस्कारों की भूमिका तो होती ही है, साथ ही यह भी कि लोकाचार, लोकसाहित्य और परंपरागत साहित्य भी कैसे लोकमंगल की भावभूमि तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इसलिए पुस्तक में षोडस संस्कारों की विस्तृत विवेचना की गई है। बिना संस्कारों के लोकमंगल भाव का स्फुटन असंभव है और बिना लोकमंगल के संस्कृति भी संस्कृति नहीं है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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