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Smriti Aur Dansh : Vibhajan Nirantarata Aur Teesri Pirhi
₹399.00 ₹299.00



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Author: Balwant Kaur
Pages: 232
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789360865030
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
स्मृति और दंश : विभाजन निरंतरता और तीसरी पीढ़ी
जैसे-जैसे मैं जीवन में आगे बढ़ती गई, मैंने कट्टर पंथियों के पागलपन का विरोध करने की हमेशा कोशिश की, चाहे वे किसी भी समुदाय के हों।…मुझे पता था कि मेरे बचपन के सपनों का भारत बिखर गया था। शायद बलवंत का भारत भी बिखर गया इसीलिए मैं और वह इस असामान्य प्रस्तावना के ज़रिये एक सह-अनुभूति रखते हैं, जिसे मैं पेश कर रही हूँ क्योंकि जब मैं इस अशांत राष्ट्र के इतिहास को याद करती हूँ तो मेरा मन इसी तरह भटकता है।
– उमा चक्रवर्ती इतिहासकार
क्या बलवंत कौर की यह कृति आत्मकथा, साहित्य-अध्ययन, इतिहास और समाजशास्त्र के बीच आवाजाही करती है ? नहीं; यह इन सबको एक साथ लाकर बल्कि मिलाकर अंदरूनी सरहदों से मुक्त एक अवकाश बनाती है जिसमें आप किसी अनुशासन के प्रति आत्मसजग हुए बगैर घूम-फिर सकते हैं। आपको पता नहीं चलता कि कब व्यक्तिगत संस्मरण सुनते-सुनते साहित्यिक कृतियों के साथ आपका संवाद शुरू हो गया और कब इतिहासकारों तथा समाजशास्त्रियों के हवाले से आप हिंसा, पहचान, अन्यीकरण, विभाजन-विस्थापन के सवालों से दो-चार होने लगे। विभाजन और उसकी निरंतरता पर यह निस्संदेह एक अनोखी किताब है।
– संजीव कुमार आलोचक
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |
बलवन्त कौर
आलोचक, अनुवाद तथा सम्पादक बलवन्त कौर हिन्दी, अंग्रेजी के अतिरिक्त पंजाबी तथा उर्दू की भी जानकार हैं। लगभग तीस वर्षों से दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में अध्यापन कर रही हैं। हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध पत्रिका ‘हंस’ के सम्पादन कार्य से भी अनेक वर्षों तक जुड़ी रहीं। आधुनिक कथा साहित्य, स्त्री अध्ययन, और विभाजन पर आधारित साहित्य इनके अध्ययन के मुख्य क्षेत्र रहे हैं।

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