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Description
सूटकेस में जिन्दगी
गाँव के अगल-बगल
संयुक्त प्रान्त आगरा एवं अवध यानी वर्तमान उत्तर प्रदेश के जिला फर्रूखाबाद में कुल चार तहसीले हैं – कन्नौज, छिबरामऊ, कायमगंज, सदर। कन्नौज का नाम सुनते ही आपके जेहन में इत्र की सुगन्ध और हर्षवर्धन की यशकीर्ति पताका कौंध गई होगी। इसी कन्नौज का एक पड़ोसी परगना हैं कायमगंज -शाहजहाँपुर, बदायूँ, एटा से सटा। परगना क़ायमगंज के एक थाने शम्साबाद के अन्तर्गत एक सामान्य सा गाँव है – रोशनाबाद (रोशन-आबाद)। इसका सम्बन्ध मध्य युग तथा आधुनिक युग की संधि पर स्थित लखनऊ की नवाबी शानो-शौकत से कहीं न कहीं जरूर रहा होगा मगर गजेटियर आफ इंडिया, फर्रूखाबाद में यह स्थान बैशाख की तेरस पर शिव-मेले के लिए महज एक स्थान पर उल्लिखित है।
थोड़ी हिचक होगी मुझे यदि मैं कहूँ कि रोशनाबाद उत्तर भारत के गाँवों का प्रतिनिधित्व करता है। हाँ, यह बात जरूर हैं कि यह प्रतिनिधि गाँव से मिलता जुलता गाँव जरूर है – अभी हाल तक गर्मियों में धूल के भयंकर बादल, जाड़े में जैंटिलमैन और बारिश में रौरव नरक के दर्शन करवाता रहा है। वैसे एक दूसरे अर्थ में इसे एक प्रतिनिधि मार्गदर्शक गाँव कहा जा सकता है। शहर की सारी बुराइयों व गाँव की समस्त खुराफातों के प्रतिनिधि मिश्रण का नाम है रोशनाबाद। यद्यपि अच्छाइयाँ भी हैं, परन्तु वे फिलहाल पीछे छूट गई लगती हैं। पड़ोस के सभी गांव इसके इस नये रूप से प्रेरणा एवं मार्गदर्शन ले रहे हैं।
हजरात, जनम तो हमारा यहाँ नहीं हुआ क्योंकि जिसे भविष्य में सूटकेस में घुसना हो, उसका गाँव में जन्म कैसे हो सकता है। मगर अपने होश सम्भालने, खेलने-कूदने तथा प्राथमिक शिक्षा के लिए हम इसके कर्जदार जरूर हुए। जैसा कि सभ्य समाज में उचित माना जाता है, उसी स्टेटस को बरकरार रखते हुए हम हेमन्त ऋतु के एक खुशनुमा इतवार को शहर इटावा के एक हस्पताल में पैदा हुए और कुछ महीनों के बाद रोशनाबाद आ गये। होश सम्भालने के बाद हमें महसूस हुआ कि उत्तर भारत के गाँव का मतलब क्या है। पहली बड़ी बारिश में पानी गाँव के चारों ओर भर जाता था और तकरीबन सभी बाहर जाने वाले बाशिन्दे अपने साथ छाता, सत्तू, लोटा, डोर तथा कपड़े का एक जोड़ा साथ लेकर घर से निकलते थे। संभलते, फिसलते गलियों में सरकते गाँव से बाहर जाकर पुनः कपड़े पहनते थे।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |











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