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Description
ताजा हवा की ताबिशें
‘ताज़ा हवा की ताबिशें’ संग्रह में चंद्रभान ‘ख़याल’ एक नए स्वर के साथ अपने रचनात्मक विकास की अगली मंजिल पर मिलते हैं। यथार्थ के नए बनते-उभरते हुए रूपों को उन्होंने अपनी सर्जनात्मक चेतना का हिस्सा बनाया है। वे भूमंडलीकरण के प्रतीक ‘आलमी बाज़ार’ को रचना-विषय बनाते हैं और उसके माध्यम से प्रकृति-पर्यावरण पर आयद ख़तरों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हैं। वहीं देश में मूल्यहीन राजनीति के बढ़ते वर्चस्व, अराजकता और हिंसा की तरफ उनकी नज़र जाती है। उनकी अधिकांश नज़्मों में सांप्रदायिक सद्भाव और साझा संस्कृति की हिफाज़त का स्वर प्रमुख रूप से विद्यमान है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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