Upaniveshavad Ka Alaukik Samrajya
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उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य
उपनिवेशवाद की भाषाई विचारधारा के अध्येता अभय कुमार दुबे विमर्शी रचनाओं के अनुवादक-सम्पादक और मीडिया मंचों पर राजनीतिक विश्लेषक के रूप में भी विख्यात हैं। दिल्ली के अम्बेडकर विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर और देशिक अभिलेख-अनुसन्धान केन्द्र के निदेशक बनने से पहले वे बीस वर्ष तक दिल्ली स्थित विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सेंटर फ़ार द स्टडी ऑ़फ डिवेलपिंग सोसाइटीज़) में प्रोफ़ेसर, अध्ययन पीठ के भारतीय भाषा कार्यक्रम के निदेशक और समाज-विज्ञान और मानविकी की पूर्व-समीक्षित पत्रिका प्रतिमान समय समाज संस्कृति के प्रधान सम्पादक रहे। उन्होंने महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित छह खण्डीय समाज-विज्ञान विश्वकोश का भी सम्पादन किया है।
हिन्दी की रचनाशीलता और आधुनिक विचार-श्रेणियों की अन्योन्यक्रिया का अध्ययन करते हुए प्रोफ़ेसर दुबे साहित्यिक रचनाओं को विमर्शी दृष्टि से परखने का प्रयास करते रहे हैं। समाज-अध्ययन को हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में लाने की परियोजना के तहत उन्हें कई ग्रन्थों के सम्पादन और प्रस्तुति के लिए भी जाना जाता है।
उनकी प्रमुख रचनाओं में हिन्दू-एकता बनाम ज्ञान की राजनीति, हिन्दी में हम : आधुनिकता के कारखाने में भाषा और विचार, सेकुलर/साम्प्रदायिक : एक भारतीय उलझन के कुछ आयाम, फ़ुटपाथ पर कामसूत्र : नारीवाद और सेक्शुअलिटी की कुछ भारतीय निर्मितियाँ, साहित्य में अनामंत्रित और क्रान्ति का आत्मसंघर्ष : नक्सलवादी आन्दोलन के बदलते चेहरे का अध्ययन उल्लेखनीय हैं। उन्होंने कांशी राम, बाल ठाकरे और मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक जीवन का अध्ययन करके ‘राजनीति के नये उद्यमी’ शृंखला के तहत तीन पुस्तकों की रचना भी की है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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