Vayam Rashtre Jagryam
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वयं राष्ट्रे जागृयाम्
युवा लेखकों के लिए प्रधानमंत्री की मेंटरशिप योजना ‘युवा’ – YUVA 2.0 (युवा, उदीयमान और प्रतिभाशाली लेखक) प्रस्तुत पुस्तक अपने शीर्षक ‘वयं राष्ट्र जागृयाम् -भारत में लोकतंत्र की संवैधानिक यात्रा’ के अनुरूप ही, एक राष्ट्र के रूप में भारत की उस संवैधानिक यात्रा को समझने का प्रयास है, जिस यात्रा की शुरुआत वैदिककालीन भारत से होती है। वैदिक ग्रंथों में ही राष्ट्र एवं राष्ट्रीयता की संकल्पना का सर्वप्रथम दिग्दर्शन होता है। ‘राष्ट्र’ एवं ‘राष्ट्रीयता’ जैसे शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए प्राचीन भारतीय समाज में इन अवधारणाओं की जीवंत अभिव्यक्ति वैदिक ग्रंथों में परिलक्षित होती है। इस प्रकार हम यह देखते हैं कि इस पुस्तक के माध्यम से जो यात्रा भारत की राष्ट्रीयता को समझने के प्रयास से प्रारंभ हुई थी, वह यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरती है। लोकतंत्र की व्यावहारिकता, संवैधानिक मूल्यों का भारतीय परंपरा में निरंतर प्रवाह, इस पर भारतीय चिंतकों के विचार, विभिन्न कालखण्डों में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, वर्तमान लोकतंत्र की चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने का प्रयास इस यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। भारत की राष्ट्रीयता के आलोक में यह जो यात्रा प्रारंभहुई थी, वह अपने अंतिम पड़ाव पर भारत के उज्ज्वल लोकतांत्रिक भविष्य की संभावना पर आकर समाप्त होती है। इस पुस्तक यात्रा में एक राष्ट्र के रूप में भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के सभी आवश्यक पहलुओं को शामिल करने का प्रयास किया गया है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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