Ve Devta Nahin Hain

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Ve Devta Nahin Hain

Ve Devta Nahin Hain

550.00 425.00

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Author: Rajendra Yadav

Availability: 5 in stock

Pages: 216

Year: 2017

Binding: Hardbound

ISBN: 9788170557333

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

वे देवता नहीं हैं

‘वे देवता नहीं हैं…’ है तो वरिष्ठ कथाकार राजेन्द्र यादव द्वारा लिखे गये समकालीनों के संस्मरण और विश्लेषण की किताब, जिसमें रामविलास शर्मा, अज्ञेय, यशपाल, मोहन राकेश, कमलेश्वर, मनमोहन ठाकौर, नजीर अकबराबादी, शानी, धर्मवीर भारती, भैरवप्रसाद गुप्त, मीरा महादेवन, शैलेश मटियानी, नरेशचन्द्र चतुर्वेदी, निर्मला जैन, लक्ष्मीचन्द्र जैन, भंवरमल सिंघी और स्वयं राजेन्द्र यादव पर राजेन्द्र यादव का संस्मरण और विश्लेषण शामिल है। अन्त में राजेन्द्र यादव पर अश्क का संस्मरण और राजेन्द्र यादव बनाम अश्क पत्राचार भी। लेकिन संस्मरणकार और विश्लेषणकार राजेन्द्र यादव का कहना कि-अचानक खयाल आया कि अगर कानूनी रूप से अग्रिम जमानत ली जा सकती है तो अग्रिम श्रद्धांजलि क्यों नहीं लिखी जा सकती ? आज ज़िन्दा बने रहना भी तो अपराध ही है। मरने के बाद लोग दिवंगत के बारे में पता नहीं क्या-क्या लिखते और बोलते हैं, वह बेचारा न उस सबका प्रतिवाद कर सकता है, न उसमें कुछ घटा-बढ़ा सकता है। दरअसल मेरे ये संस्मरण उसी लाचार आदमी के प्रतिवाद हैं। माध्यम मैं हूँ, मगर गुहार उस असहाय की है जो बलात्कार के खिलाफ न्याय की माँग कर रहा है। सचमुच यह कितना बड़ा राक्षसी षड्यन्त्र है कि हम धो-पोंछकर, काट-छील कर हर किसी को एक ही साँचे में घोंट-पीस डालते हैं कि उसकी सारी “अदितीयता” समाप्त हो जाती है। सब एक-दूसरे के प्रतिरूप देवता बने काँच के बक्सों से हमें घूरते रहते हैं।

“औरों के बहाने” के साथ “वे देवता नहीं हैं…” मिलाकर पढ़ने से राजेन्द्र यादव के जीवन का काफी हिस्सा जाना जा सकता है। राजेन्द्र जी का कहना है कि उनके द्वारा लिखे संस्मरण, कहानियाँ-उपन्यास सब मिलाकर मेरी ही आत्मकथा के टुकड़े हैं।

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Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2017

Pulisher

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