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योद्धा संन्यासी
योद्धा संन्यासी बनना आसान नहीं है, परम निर्भीक ही इस पदनाम से सुशोभित हो सकता है। उस ज़माने के किसी संन्यासी द्वारा किसी महिला को सहजता के साथ अपने मित्र कहने का साहस होना सिर्फ़ एक योद्धा में ही सम्भव था, यह साहस तो आज भी किसी संन्यासी में दृष्टिगोचर नहीं होता।
आज भी विदेशी सभ्यता की महिलाओं की भारतीय धार्मिक समाज निन्दा करना अपना कर्तव्य समझता है। उन्हीं महिलाओं के बारे में भरी सभा में यह कहना कि ‘एक हज़ार अमेरिकन स्त्रियों की तरह अगर भारत में बना पाया, समझँगा माँ जगदम्बा ने मेरा जन्म लेना सार्थक कर दिया’, कितना आश्चर्यजनक लगता है।
भारत तब तक सुखी नहीं हो सकेगा जब तक वह स्त्रियों का सम्मान करना नहीं सीखेगा। हम लोग स्त्री जाति को नीच, अधम, महाहेय एवं अपवित्र कहते हैं, फलस्वरूप हम लोग पशु, दास और हीन हो गये हैं। कृतज्ञता के सद्गुण से परिपूर्ण संन्यासी अमेरिकन स्त्रियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहता है—सौ जन्मों तक जन्म लेकर उनकी सेवा करूँ तो भी उनके ऋण से उऋण नहीं हो सकता। इस बात को डंके की चोट पर पूरी दुनिया के सामने रखना कोई सहज बात नहीं है।
जो मानव मात्र की सेवा नहीं, पूजा करने की बात सिर्फ़ कहता नहीं है, करने के लिए तत्पर रहता है। वह अपने गुरुभाइयों से आह्वान करता है—तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं को समेटकर समुद्र में डुबो दो और साक्षात् तैंतीस करोड़ नारायण की पूजा में लग जाओ।
जो संन्यासी बड़ी मुश्किल से कठिन परिश्रम और अमेरिकन स्त्रियों की मदद से मठ का निर्माण करता है, महामारी फैलने पर मानवों की सेवा के लिए क्षण भर में उसे बेचकर सेवा करने को तत्पर हो जाता है। जिसके हृदय में शोषितों, वंचितों, ग़रीबों, दलितों, दीन जनों के लिए करुणा और प्रेम का संचार होता रहता है। जिनके दुख से दुखी होकर वह रोता है। वह देशवासियों को धिक्कारते हुए कहता है-भारत के लाखों अनाथों के लिए कौन रोता है? हे भगवान, क्या हम मनुष्य हैं? तुम लोगों के घरों के चारों तरफ़ जो पशुवत जी रहे, भंगी और डोम हैं, उनके लिए क्या कर रहे हो? उनके मुख में एक ग्रास देने के लिए क्या कर रहे हो ? बताओ ना। उन्हें छूते तक नहीं और दुदुरा करके भगा देते हो। क्या हम मनुष्य हैं? वे हज़ारों साधु ब्राह्मण भारत की दलित जनता के लिए क्या कर रहे हैं? मत छू, मत छू—बस यही रट लगाते हैं। अब धर्म है कहाँ ?
—भूमिका से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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