Sharat Chandra Chattopadhyay

Sharat Chandra Chattopadhyay

शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय

(15 सितम्बर 1876-16 जनवरी 1938)

बाँग्ला के अमर कथाशिल्पी शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय प्रायः सभी भारतीय भाषाओं में पढ़े जाने वाले शीर्षस्थ उपन्यासकार हैं। उनके कथा-साहित्य की प्रस्तुति जिस रूप-स्वरूप में भी हुई, लोकप्रियता के तत्त्व ने उसके पाठकीय आस्वाद में वृद्धि ही की। सम्भवतः वह अकेले ऐसे भारतीय कथाकार भी हैं, जिनकी अधिकांश कालजयी कृतियों पर फिल्में बनीं तथा अनेक धारावाहिक सीरियल भी। ‘देवदास’, ‘चरित्राहीन’ और ‘श्रीकान्त’ के साथ तो यह बारम्बार घटित हुआ है।

अपने विपुल लेखन के माध्यम से शरत् बाबू ने मनुष्य को उसकी मर्यादा सौंपी और समाज की उन तथाकथित ‘परम्पराओं’ को ध्वस्त किया, जिनके अन्तर्गत नारी की आँखें अनिच्छित आँसुओं से हमेशा छलछलाई रहती हैं। समाज द्वारा अनसुनी रह गई वंचितों की बिलख-चीख और आर्तनाद को उन्होंने परखा तथा गहरे पैठकर यह जाना कि जाति, वंश और धर्म आदि के नाम पर एक बड़े वर्ग को मनुष्य की श्रेणी से ही अपदस्थ किया जा रहा है। इस षड्यन्त्र के अन्तर्गत पनप रही तथाकथित सामाजिक ‘आम सहमति’ पर उन्होंने अपने लेखन के माध्यम से रचनात्मक हस्तक्षेप किया, जिसके चलते वह लाखों-करोड़ों पाठकों के चहेते शब्दकार बने। नारी और अन्य शोषित समाजों के धूसर जीवन का उन्होंने चित्राण ही नहीं किया, बल्कि उनके आम जीवन में आच्छादित इन्द्रधनुषी रंगों की छटा भी बिखेरी। प्रेम को आध्यात्मिकता तक ले जाने में शरत् का विरल योगदान है। शरत्-साहित्य आम आदमी के जीवन को जीवंत करने में सहायक जड़ी-बूटी सिद्ध हुआ है।

हिन्दी के एक विनम्र प्रकाशक होने के नाते हमारा यह उत्तरदायित्व बनता ही था कि शरत्-साहित्य को उसके मूलतम ‘पाठ’ के अन्तर्गत अलंकृत करके पाठकों को सौंप सकें, अतः अब यह प्रस्तुति आपके हाथों में है। हमारा प्रयास रहेगा कि किताबघर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और प्रकाश्य शरत्-साहित्य को सर्वांग तथा सर्वश्रेष्ठ होने का प्रमाणपत्र आप जैसे सुधी पाठकों द्वारा ही जारी किया जाए।

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