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Aacharya Ramchandra Shukla : Aalochana Ke Naye Mandand
₹300.00 ₹225.00



₹300.00 ₹225.00
₹300.00 ₹225.00
Author: Bhavdeo Pandey
Pages: 215
Year: 2003
Binding: Hardbound
ISBN: 9788126707997
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल : आलोचना के नए मानदंड
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के पहले हिन्दी आलोचना का कोई व्यवस्थित ढाँचा तैयार नहीं हुआ था। कृति के गुण-दोष-दर्शन में दोष ढूँढ़ने का प्रचलन अधिक था। दोष-दर्शन में भी भाषागत त्रुटियों को ज़्यादा महत्त्व दिया जाता था। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने आलोचना के ऐतिहासिक और समाजशास्त्राीय स्वरूप की प्रस्तुति की और ‘लोक के भीतर ही कविता क्या किसी भी कला का प्रयोजन और विकास होता है’—के सिद्धान्त का निरूपण किया। उन्होंने आलोचना को व्यवस्थित रूप देने के लिए कुछ निश्चित मानदंड स्थापित किए।
यह पुस्तक आचार्य शुक्ल के जीवन, आलोचक के रूप में, के विकास और उनकी दृष्टि का एक सम्पूर्ण ख़ाका खींचने की कोशिश करती है। उनके प्रामाणिक जीवन-वृत्त के साथ ‘बीसवीं शताब्दी का काव्यात्मक आन्दोलन’ (कविता क्या है?); ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल’; ‘वैचारिक निबन्धों के प्रथम आचार्य’; ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की आलोचना दृष्टि’ और ‘उनकी साहित्येतिहास दृष्टि’—इन पाँच अध्यायों में विभक्त यह पुस्तक आचार्य शुक्ल को समझने और पढ़ने के नए द्वार खोलती है। इसके अलावा डॉ. पांडेय ने गहन शोध के बाद इस पुस्तक में आचार्य शुक्ल से सम्बन्धित अभी तक अनुपलब्ध कई महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ भी जुटाई हैं।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2003 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |
भवदेव पांडेय
जन्म : 1924; ग्राम—भरामा, ज़िला—गोरखपुर।
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) पीएच.डी.।
पूर्व हिन्दी प्राध्यापक, के.बी.पी.जी. कॉलेज, मिरजापुर, उत्तर प्रदेश।
प्रकाशित कृतियाँ : ‘अन्धेर नगरी : समीक्षा की नई दृष्टि’ (1995), ‘अंधायुग : अधुनातन समीक्षा दृष्टि’ (1995), ‘भारतेन्दु हरिश्चन्द्र : नए परिदृश्य’ (1997), ‘बंग-महिला : नारी मुक्ति का संघर्ष’ (1999), ‘पाण्डेय बेचन शर्मा ‘उग्र’’ (2001)।
हिन्दी की लगभग सभी साहित्यिक पत्रिकाओं में आलोचना, लेख, संस्मरण, इंटरव्यू आदि निरन्तर प्रकाशित। दूरदर्शन और आकाशवाणी से वार्ता, रेडियो रूपक, कविता आदि प्रसारित।

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